भोपाल, बलराम शर्मा। देशभर में अब अनलॉक 5 का दौर चल रहा है, जहां तमाम चीजें खुल चुकी हैं और आम जनजीवन कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन करते हुए लगभग पटरी पर लौट आया है। लेकिन आपको यह जानकर हैरत होगी कि होशंगाबाद में एक सांस्कृतिक शैक्षिक परिसर ऐसा भी है, जो अभी भी लॉकडाउन का पूर्णत: पालन कर रहा है। यह है शहर के बीटीआई क्षेत्र में स्थित एक गुरुकुल, जिसमें वर्तमान में करीब 100 सदस्य स्थायी रूप से रहते हैं। ये सदस्य हैं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, बिहार व महाराष्ट्र आदि प्रांतों से आए हुए 76 ब्रम्हचारी, 10 आचार्य, 1 प्रधान आचार्य 1 गुरुकुल अध्यक्ष व 11 सेवकगण। देश- प्रदेश- शहर में कोरोना का प्रकोप सभी जगह दिखा, लेकिन गुरुकुल से यह महामारी कोसो दूर हैं। इसकी वजह है गुरुकुलवासियों का अनुशासन और कोरोना गाइडलाइन का पूर्णत: पालन।

सात माह से लटका है ताला

कोरोना से बचाव के लिए मार्च के आखिरी हफ्ते में देशव्यापी लॉकडाउन लागू हुआ था और आपको जानकर हैरत होगी कि इस गुरुकुल के मुख्य द्वार पर तभी से यानी बीते सात माह से ताला लटका है। आज भी इस गुरुकुल में किसी भी व्यक्ति का प्रवेश प्रतिबंधित है।

कोरोना गाइडलाइन का पूर्णत: पालन

गुरुकुल अध्यक्ष स्वामी ऋतस्पति परिब्राजक बताते हैं कि गुरुकुल परिवार ने शासन के नियमों का पूर्णत: पालन किया है। दो गज की दूरी, साबुन से हाथ धोना तो करते ही हैं। सबसे ज्यादा लाॅकडाउन हमारे यहां अभी तक है। गुरुकुल के गेट पर मार्च से ताला लगा है। जिसे अभी तक खोला ही नहीं है। ना तो किसी को गुरुकुल के अंदर आने की अनुमति दी। ना यहां से कोई कहीं जाना चाहता है। हम 7 माह से गुरुकुल से बाहर नहीं गए।

विदेशी शिष्य लॉकडाउन के दौरान परिसर में ही रहे

स्वामी ऋतस्पति परिब्राजक बताते हैं कि लॉकडाउन लगने से पूर्व मेरे एक शिष्य संजय छेदी मॉरीसिस से आए थे। तभी फ्लाइट बंद हो गई थी। वह यहां पर पांच माह तक निवासरत रहे। वे भी यहां से कहीं भी नहीं गए जब हवाई यात्रा शुरू हुई तभी वे यहां से अपने देश रवाना हुए।

Posted By: Ravindra Soni

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