Chaitra Navratri 2021: नर्मदापुरम(होशंगाबाद)नवदुन‍िया प्रतिनिधि। प्रत्येक नवरात्र के अवसर पर मां नर्मदा के तट के खर्राघाट पर स्थित प्राचीन देवी मंदिर हिंगलाज मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण पुजारी ही गर्भगुफा में पूजन अर्चन कर रहे हैं। जो कुछ देवी भक्त देवी दरवार में पहुंच रहे हैं। वे बाहर से ही दर्शन कर रहे हैं। शारदीय और चैत्र दोनो नवरात्र में यहां पर सुबह से देर शाम तक देवी चहल पहल बनी रहती थी। क्योंकि यह धार्मिक स्थल प्राकृतिक वातावरण में होने के साथ ही शहर से तीन किलोमीटर दूर सुगम मार्ग होने से यहां पर नवरात्र के अलावा भी भक्तों का आना जाना वर्ष भर लगा रहता है।

मां नर्मदा का तट होने के साथ ही विशाल रेतीला मैदान और एक साथ सड़क तथा तीन रेल के पुल होने से यहां मंदिर के पास सुहावना स्थान बना हुआ है। जो एक बार यहां पहुंच जाता है उसकी इच्छा बार-बार जाने की होती है। लोग यहां पर देवी मां के दर्शन के साथ ही पिकनिक भी मनाते हेैं। कई लोगों के द्वारा यहां पर भंडारे के आयोेजन किए जाते हैंं। मंदिर समिति के द्वारा हर वर्ष भंडारा भी किया जाता रहा है।

9 फीट नीचे गुफा में विराजमान हैं देवी मां

देवी मां की प्राचीन प्रतिमा गुफा में जमीन के स्तर से करीब 9 फीट नीचे विराजमान हैं। जहां पर एक साथ पांच लोग ही नीचे बैठकर पूजन अर्चन दर्शन कर सकते हैं। इस तलघर वाले वातावरण में पहुंच कर माथा टेकने के दौरान एक अलग ही शांति का एहसास होता है। लेकिन इस कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए गुफा में अन्य बाहरी लोगाें को प्रवेश की अनुमति नहीं है।

देवी की महिमा

देवी मां के पुजारी पं भवानी प्रसाद तिवारी ने बताया कि 1970 में देवी मां की प्राचीन प्रतिमा स्थापित थी। जहां पर एक साधु पूजन करते थे। एक छोटी मढिया बना कर रहते थे। लेकिन तीन वर्ष बाद ही 1973की भीषण बाढ़ के समय सब कुछ नष्ट हो गया। देवी मां की प्रतिमा भी रेत और भसुआ में नीचे दब गई। सब भूल गए। उसके बाद यहां पर नर्मदा तट के पास ही रेल का पुल बनना शुरू हुआ। पुल का कुछ हिस्सा बन गया था। लेकिन एक पिल्लर नहीं बन पा रहा था। बार- बार टूट कर गिर रहा था।

तब परेशान होते हुए ठेकेदार ने नर्मदा तट पर पूजन की और उसके बाद देवी मां से प्रार्थना की तब उसी दिन उसे रात में स्वप्न में मां ने कहा कि यहां पर देवी मां का स्थान है इस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया जाए। ठेकेदार ने दूसरे दिन से ही मंदिर के निर्माण का कार्य शुरू किया उसी के साथ पिल्लर भी बन गया। पूर्व में डीआरएम भी यहां पर आए हैं उन्होंने भी कहा था कि यह रेलवे की जगह है यहां पर रेलवे के माध्यम से सर्किट हाउस जैसा स्थान बनाया जाए। लेकिन अधिकारी कह चले गए हुआ कुछ नहीं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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