होशंगाबाद। रामलीला समिति के द्वारा शताधिक वर्षों की परंपरा के चलते 18 दिन की रामलीला का आयोजन किया जाता है। रामलीला का संयोजन इस प्रकार होता आ रहा है कि दशहरे के दिन राम रावण युद्ध की लीला होती है, राम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने पर विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इस दौरान रावण के करीब 30 फीट ऊंचे पुतले का दहन किया जाता रहा है। लेकिन कोरोना के कारण इस बार रामलीला का आयोजन सिर्फ 10 दिन का किया गया है। पुतले भी पूर्व की अपेक्षा 10 फीट कम ऊंचाई वाले रखे गए हैं। जिससे परंपरा कायम रहे। पूर्व में दशहरा मैदान में तीन दिन रामलीला होती थी। जिसमें पहले दिन कुंभकरण वध दूसरे दिन मेघनाथ वध की लीला होती थी। अलग-अलग दिन पुतलों का दहन होता था। लेकिन इस बार रावण दहन के साथ ही कुंभकरण और मेघनाथ की लीला एक साथ तीनों पुतलों का दहन होगा।

रामलीला को देखने के लिए आसपास ग्रामीण अंचल से करीब 15 हजार दर्शक मैदान में बैठकर आनंद लेते थे, लेकिन इस बार कोरोना के नियमों को ध्यान में रखते हुए रामलीला समिति के सीमित सदस्य ही शामिल रहेंगें। रामलीला भी एक घंटे में पूरी कर शाम को पुतलों का दहन किया जाएगा। प्रशासन ने आयोजन के दौरान होने वाली व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। दुर्गा प्रतिमाओं को भी दशहरा मैदान की बजाए सीधे विसर्जन के लिए ले जाया जाएगा।

Posted By: Prashant Pandey

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