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नवदुनिया एक्सक्लुसिव

संभावना को तलाशने मंदसौर जाएंगे कि सान,सभी विकासखंड से होना है 2-2 कि सानों का चयन

बलराम शर्मा। होशंगाबाद

मप्र के मात्र मंदसौर, रतलाम और नीमच जिले में होने वाली अफीम की खेती की संभावना अब होशंगाबाद जिले में भी तलाशी जा रही है। कृषि विभाग ने मिट्टी और जलवायु परीक्षण में यह पाया है कि होशंगाबाद जिले में भी अफीम की खेती की जा सकती है। परंतु इस खेती के लिए यहां के कि सानों को प्रशिक्षण देना जरुरी है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग प्रत्येक विकासखंड से दो-दो कि सानों का चयन अफीम की खेती के लिए प्रशिक्षण के लिए कर रहा है। प्रशिक्षण से पहले कि सानों के समूह को मंदसौर का भ्रमण कराया जाएगा।

जिस प्रकार का प्लान प्रशासन बना रहा है यदि वह सफल रहा तो कृषि प्रधान जिले में भी अब अफीम की खेती शुरू हो जाएगी। कि सानों के समूह को मंदसौर जिले में ले जाने की तैयारी शुरू हो रही है। इसके लिए कृषि विभाग के हमजोली विभाग आत्मा परियोजना के माध्यम से जिले के सभी ब्लाकों के कु छ चुनिंदा गांव से कि सानों का चयन कि या जाना है। इसके लिए आत्मा परियोजना के उपसंचालक के द्वारा ब्लाकों के कि सानों से संपर्क कि या जाना शुरू हो रहा है।

अनेक फसलों में सफल रहा है जिला

इस जिले की उर्वरा शक्ति को ध्यान में रखते हुए पहले जो अनेक प्रयोग हुए हैं उनमें शुरूआत के समय सभी फसलों में जिला सफल रहा है। चाहे गेहूं- चना की पैदावार हो, सोयाबीन हो, मूंग हो, धान हो, या फिर रेशम ही क्यों ना इन सभी की पैदावार में जिले ने प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर झंडे गाड़े हैं। इसी कड़ी में अब प्रशासन के द्वारा प्रदेश के नीमच, मंदसौर, और रतलाम की तरह होशंगाबाद में भी अफीम की खेती की संभावना को तलाशने के प्रयास कि ए जा रहे हैं।

हर ब्लाक का प्रतिनिधित्व

प्रशासन स्तर पर यह प्रयास कि या जा रहा है कि कि सानों के समूह को जो भ्रमण कराया जाता है। इस बार अफीम की खेती करने वाले जिलों का भ्रमण कराया जाए। जिसमें जिले के सभी विकासखंडों से कि सानों का चयन कि या जाए जो कि अफीम की पैदावार वाले जिले में भ्रमण करके यह देखें कि वहां की भूमि और यहां की भूमि का वातावरण अफीम की खेती से कि तना मेल खाता है।

कि सानों को भ्रमण कराएंगे

जिले में हर तरह की खेती की प्रबल संभावना रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अफीम की खेती के लिए जिले के कि सानों को मंदसौर,रतलाम, या नीमच क्षेत्र का शीघ्र भ्रमण कराया जाएगा। जिपं सीईओ की अनुमति लेकर कि सानों का चयन कि या जाएगा।

एमएल दिलबरिया, उप संचालक आत्मा परियोजना कृषि

Posted By: Nai Dunia News Network