काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजन

इटारसी। युवा पत्र लेखक मंच के तत्वावधान में कवि गुलाब भूमरकर के संयोजन में शनिवार रात दीवान कॉलोनी स्थित कुणाल कुंज पुरानी इटारसी में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। बसंत उत्सव श्रृंखला के तहत आयोजित विराट काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ रामवल्लभ गुप्त ने की। देर रात तक चली काव्य गोष्ठी में विशेष अतिथि के रूप में प्रसिद्घ व्यंग्यकार ब्रजकिशोर पटेल उपस्थित थे। शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर किया गया। कवि गुलाब भूमरकर ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति देकर काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। अरविंद त्रिपाठी ने गजल लिख रहा हूं, कलाम लिख रहा हूं मोहब्बत में तुझको सलाम लिख रहा हूं। माखनलाल निर्मोही ने मिलकर चलाएं घर धंधा, सजनवा तुम सूरज हम चंदा, जफ़र उल्लाह खान ने वादा क्यों भूल जाते हैं वो हमने तो उनके वादे पर सब कुछ लुटा दिया, राजेन्द्र भावसार सागर ने अखिल भारतीय हुआ कवि सम्मेलन पधारे तीन चिंतामन और दो बैगन', सुनील जनोरिया ने मूल वसूलेंगे पुलवामा का रचना का पाठ किया। इनके अलावा राजेश गुप्ता, ममता वाजपेयी, अविनेश चंद्रवंशी, सुनील यादव, मनमोहन यादव, राजेश दुबे, मगनलाल पटेल, जमना सिंह राजपूत, बीएल पटेल आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

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चर्च की स्थापना दिवस पर मनाया आनंद उत्सव

इटारसी। इवेंजलिकल लूथरन चर्च के स्थापना दिवस को 47 वर्ष पूरे होने पर आनंद उत्सव मनाया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में चर्च के बिशप राइट रेवरेंट इमैनुएल पंचू ईएलसी इन एमपी उपस्थित रहे। इस चर्च भवन की स्थापना 1974 में मिशन सेके्रटरी रेवरेंट गुन्नैर स्वनसन एवं उद्घाटन राइट रेवरेंट आर इसराइल सन बिशप ऑफ छिंदवाड़ा द्वारा किया गया था। इस स्थापना दिवस पर रंगारंग कार्यक्रम हुए। समाज के लोगों द्वारा लघु नाटिका गीत संगीत प्रस्तुत किया गया। आराधनालाय का संचालन रेवरेंट शांत्वन लाल एवं रेवरेंट राहुल दास द्वारा किया गया।

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इटारसी। सामूहिक प्रार्थना करते हुए क्रिश्चियन समुदाय के लोग।

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कबड्डी में शाजापुर को हराकर टिमरनी बनी विजेता

इटारसी। ग्राम रैसलपुर में आयोजित कबड्डी प्रतियोगिता के राज्य स्तरीय आयोजन में अंतिम मुकाबला शहडोल और टिमरनी के मध्य हुआ। टिमरनी ने शाजापुर को शिकस्त देकर प्रत्यिोगिता का राज्य स्त्रीय खिताब हासिल किया।

खूंटिया बाबा खेल मैदान रैसलपुर में आयोजित राज्यस्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में प्रदेश के विभिन्न जिलों की प्रतिभाशाली टीमों ने हिस्सा लिया, सभी ने एक दूसरे के विरुद्घ बेहतर खेल का प्रदर्शन किया। अंतिम मुकाबला हुआ पोलाई कबड्डी टीम शाजापुर एवं हरदा जिले की टिमरनी टीम के मध्य जो बेहद रोमांचक रहा। शनिवार की मध्य रात्रि को इस फाइनल मुकाबले में टिमरनी ने शाजापुर को हराकर प्रतियोगिता की विजेता टीम का खिताब हासिल किया। टीम को गोल्ड कप और नकद राशि दी गई।

पूर्व सरपंच भुजबल सिंह सौलंकी ने अवार्ड दिया। उपविजेता टीम शाजापुर को द्वितीय पुरस्कार नकद एवं गोल्ड

ट्राफी राहुल सिंह तोमर के सहयोग से दिया गया।

सेमीफाइनल में प्रथम विजेता पीपलढाना को पूर्व सरपंच शिवशंकर झलिया के सहयोग से रजत ट्राफी प्रदान की गई। प्रत्यिोगिता की चतुर्थ टीम रही पांजरा कला, जिसे उपसरपंच दुष्यंत गौर ने अवार्ड दिया। विशेष पुरस्कार न्यू आजाद क्लब रैसलपुर को समाजसेवी जगदीश बढिया के सहयोग से पांच हजार रुपए दिए गए। समापन अवसर पर समिति अध्यक्ष अरविन्द शर्मा, उपाध्यक्ष जयनारायण चौधरी, सचिव टीकाराम चौरे एवं कोषाध्यक्ष अशोक पटेल के साथ युवा सदस्य रजनीश झलिया, विजय पटेल, सुरेन्द्र सौलंकी, पूर्व जनपद अध्यक्ष राममोहन मलैया, गोकुल पटैल आदि मौजूद थे। मंच संचालन राहुल सौलंकी ने किया।

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इटारसी। विजेता कबड्डी टीम को अवार्ड दिए गए।

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मन को संवारने से मनुष्य बनता है संतः तिवारी

इटारसी। ज्ञानी के क्रोध मे सभी का हित छिपा होता है और अज्ञानी के क्रोध में स्वार्थ छिपा होता है। क्रोध करना है तो करो, अपने किए हुए पाप ,अपराध, बुराई ,दुर्गुणों, बुरी आदतों पर करो। यह बात शिवनगर चांदौन में आयोजित भागवत सत्संग के समापन अवसर पर कथाकार संदलपुर के पं. भगवती प्रसाद तिवारी ने कही। उन्होंने कहा भगवान के बनाए इस संसार में अनेक साधु ,संत ,महात्मा ,महापुरुषों का जन्म होता है। वे मनुष्य समाज को जाति, धर्म, ऊंच ,नीच, छोटा, बड़ा, अमीर, गरीब भेदभाव से उपर उठाना चाहते हैं। घर एक मंदिर होता है, माता पिता उस मंदिर के प्रत्यक्ष साक्षात देवता है, सन्तान उपासक होती है। सधो ज्ञानी भक्त जो परमात्मा से प्रेम करता है, वह कभी भी पाप नही कर सकता है, पाप वह करता है जो अज्ञानी है जिसने सधो संत, सतगुरू का सत्संग नहीं सुना, जो भगवान जी से विमुख है। वासना का पर्दा दूर होने के बाद ही आत्मरस का अनुभव होता है। जीव और ईश्वर दोनों साथ में ही रहते हैं, बीच में अज्ञान ,माया, वासना का पर्दा है। सत गुरूदेव की जब कृपा होती है, तब वासना का पर्दा दूर होता है। जब तक विषय वासना है, भगवानजी हम से दूर हैं ऐसा लगता है। वासना का विनाश तीव्र भक्ति से होता है। जन्मदिन पर मनुष्य जन्म को सार्थक बनाने का विचार ,संकल्प लेना ही जन्मदिन की सार्थकता है ।

कुछ लोग ऐसा समझने लगे हैं कि पैसा कमाना है तो झूठ, पाप ,चोरी, बेईमानी करना पड़ती है। पाप किए बिना पैसा नहीं मिलता है। संत, ग्रंथ कहते है कि जो पैसा प्रारब्ध में है वही मिलेगा ।मानव अज्ञानता से ऐसा समझता है कि आज मैं झूठ बोला इसलिए मुझे लाभ हुआ। ये बड़ी भूल है ।आज तुम्हें लाभ होने वाला ही था, झूठ बोलने का पाप तेरे माथे आया और दुख भोगना पड़ेगा। झूठ बोलने से पैसा नहीं मिलता है । जिसके भाग्य में पैसा लिखा नही है ,वह हजार झूठ बोले तो क्या उसको पैसा मिलेगा। भगवानतो नास्तिक को भी पैसा ,सुख देते हैं, जो ऐसा बोलता है कि मैं ईश्वर को नही मानता उसको भी भगवान धन देते ,मान देते ,सुख देते हैं। आप भक्त हो ,सज्जान हो ,धार्मिक हो ,न्याय ,नीति से कमाते हो आपको भगवान धन देंगें ,आपको सुख मिलेगा ही ।प्रभु में सत्य में विश्वास रखो ।जो मनुष्य तन और धन को बहुत संवारता है वो संसारी और जो तन और धन से ज्यादा मन को संवारता है वह संत है ।जिसका मन बहुत बिगड़ा हुआ है ,उसका यह जन्म तो बिगड़ेगा ,दूसरा जन्म भी बिगड़ जाएगा। अपने मन को संभालो इसे बिगड़ने मत दो। भगवानजी का नाम ,ध्यान, कथा, सत्संग, सेवा से मन और बुद्घि की शुद्घि होती है ।जो प्रभु श्रीहरि परमात्मा का नाम नहीं जपता है, उसका मन और बुद्घि बिगड़ जाती है। मन को बार बार समझाने से मन सुधरता है ।अपने मन को सुधारो। आपके मन को दुसरा कोई सुधार नही सकता है। रविवार को कथा का विश्राम महाप्रसादी विशाल भंडारे के साथ हुआ। सतगुरू श्री शुकदेवजी महाराज ने भागवत के माध्यम से समझाया कि मुक्ति तन के मरने पर नहीं बल्कि मन के मरने पर प्राप्त होती है। सत्कर्म ,सत्संग और संकीर्तन से मनुष्य का जीवन सुखमय ,शांतिमय ,आनंदमय होता ही है।

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इटारसी। कथा का श्रवण करते हुए श्रद्घालु।

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Posted By: Nai Dunia News Network