हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

कॉलेजों में युवा उत्सव आयोजन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 26 सितंबर से महाविद्यालय स्तर पर कार्यक्रम शुरू होंगे। युवा उत्सव में लोक नृत्य सामूहिक फोक डान्स, लोकगीत सामूहिक फोक सांग, शास्त्रीय नृत्य कत्थक, भरतनाट्यम, मणिपुरी, कुचीपुडी, ओडिसी, शास्त्रीय संगीत हिन्दुस्तानी शैली, शास्त्रीय संगीत कर्नाटक शैली, एकांकी नाटक, हारमोनियम लाइट, सितार, बांसुरी, तबला, वीणा, मृदंग, गिटार वादन, वक्तृत्व कला विधाएं शामिल की गई है। प्रतिभागियों की आयु सीमा 15 से 29 वर्ष के मध्य निर्धारित है। जिला स्तर पर युवा उत्सव के दौरान प्रतियोगिता का आयोजन स्वामी विवेकानंद सरकारी कॉलेज में किया जाएगा। हांलाकि इसके पहले जिले के सभी कॉलेजों की बैठक कर प्राचार्य द्वारा स्पर्धा स्थल का निर्धारण करेंगे। अन्तर कक्षा महाविद्यालय स्तर पर 26 से 28 सितंबर तक कार्य होंगे। इसमें चयनित प्रतिभागी जिला स्तर के महाविद्यालय के कार्यक्रम में 3 से 5 अक्टूबर तक प्रस्तुती देंगे। यहां से चयनित होने वाले विद्यार्थी विश्वविद्यालय स्तर पर 13 से 15 नंबवर तक प्रस्तुति देंगे। युवा उत्सव को लेकर छात्र - छात्रओं ने कॉलेजों में तैयारी शुरू कर दी है।

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हरदा पेज लीड खबर

फोटो 1 हरदा। बाजार में खुले में बिक रही तंबाकू ।

कैचवर्डः एक साल पहले नपा को मिले थे आदेश, आज तक नहीं हुई कार्रवाई

हैडिंगः लापरवाहीः शिक्षक संस्थानों के पास से नहीं हटी दुकानें, बोर्ड तक नहीं लगे

फैक्ट फाइल

1500 : के करीब हैं जिले में निजी, सरकारी शिक्षण संस्थान

75 : फीसदी शिक्षण संस्थानों के बाहर नहीं है धूम्रपान निषेध के बोर्ड

35 : प्रतिशत शिक्षण संस्थाओं के बाहर है गुटखा, धूम्रपान के कैबिन

हरदा। नवदुनिया प्रतिनिधि

शिक्षण संस्था के पास से तंबाकू उत्पादन की दुकानें हटाने के लिए एक साल पहले नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा नगर पालिका को आदेश जारी किए थे। जिसमें बताया था, कि तम्बाकू उत्पाद अधिनियम 2003 की धारा 4, 5, 6 एवं 7 का जिले में कड़ाई से लागू किया जाना है। उप सचिव ने मुख्य नगर पालिका को निर्देशित किया है, कि सार्वजनिक स्थानों पर धुम्रपान करने वाले लोगों पर 200 रुपए का जुर्माना लगाया जाए। लेकिन आज दिनांक तक सार्वजनिक स्थानों पर धुम्रपान करने वाले लोगों पर कोई जुर्माना नहीं लगा है। इसके साथ ही उन्होंने तंबाकू बेचने वाली दुकानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, शिक्षण संस्थान के पास से तंबाकू उत्पादन हटाने के भी निर्देश दिए थे। लेकिन यह निर्देश भी हवा हो गए। शहर के सार्वजनिक स्थानों बस स्टैड, रेलवे स्टेशन, बाजारों आदि में लोग पूरा दिन धूम्रपान करते नजर आते है। ट्रेनों और बसों में तो दूसरे यात्री भी धूम्रपान से परेशान रहते है लेकिन आम आदमी ही नहीं बल्कि कानून के रखवाले भी बीड़ी सिगरेट का लुत्फ उठाते है। बसों में सवारियों के साथ चालक व परिचालक भी बीड़ी सिगरेट का कश लगाते है। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान न करने के तमाम नियम सिगरेट और बीड़ी के धुएं में उड़ रहे है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना एक तरह से मजाक बन रहा है। न ही नियम तोड़ने वालों को फिक्र है और न ही नियम का पालन कराने वालों को कोई परवाह।

धूम्रपान करने वालों का आज तक नहीं काटा चालान

सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करने वालों पर जुर्माना होता है मगर उसकी किसी को परवाह नजर नहीं आती क्योंकि अभी तक शायद ही किसी व्यक्ति का इस मामले में चालान काटा गया हो। सार्वजनिक स्थानों पर बीड़ी सिगरेट पीने वालों पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध लगने से कुछ लोग खुश तो हैं मगर उन्हे इस पर पाबंदी न लगने से मायूस ही होना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा आज तक धूम्रपान रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

स्कूलों के पास बिक रहा गुटखा-सिगरेट

स्कूलों और कॉलेजों के सौ गज के दायरे में बीड़ी, सिगरेट या गुटखा जैसे तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण पाबंदी का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। नियमों के मुताबिक सभी शैक्षणिक संस्थानों को अपनी बाउंड्री के बाहर की ओर यह सूचना लगाना आवश्यक है कि उसके सौ गज के दायरे में यानी 300 फीट में तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। दर्जनों स्कूलों और कॉलेजों के आगे पान की गुमटियों में तंबाकू उत्पादों की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। कई दुकानों में अन्य नशा भरा हुआ सिगरेट भी बिक रहा है। छात्र धड़ल्ले से गुटखा खरीदकर चबाते हैं। इन सब के बाद भी जिला प्रशासन व स्कूल प्रबंधन इस स्थिति से आंखे मूंदे हुए है।

कश के छल्लों में उड़ा कानून

धूम्रपान पर नियंत्रण के लिए वर्ष 2003 में सिगरेट एवं अन्य तंबाकू नियंत्रण अधिनियम (कोटपा) बनाया गया। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करते हुए पाए जाने पर न्यूनतम दो सौ रुपए से लेकर दस हजार तक जुर्माना वसूलने का प्रावधान है। साथ ही सभी विक्रेताओं को खुलेआम तंबाकू सामग्री बेचने व प्रदर्शन करने पर रोक लगाई गई थी। मगर इसकी कहीं भी पालना होती नहीं दिखती। कोटपा एक्ट की सख्ती से पालना को लेकर अधिकारी कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में बीते 12 वर्षों में स्कूलों के बाहर धूम्रपान निषेध को लेकर एक भी चालान नहीं हुआ है। जबकि अधिकांश स्कूलों, दफ्तरों व सार्वजनिक स्थानों पर कर्मचारियों व लोगों के धुएं के छल्ले उड़ाने के दृश्य आम है।

यह है तंबाकू नियंत्रण अधिनियम-2003

1. धारा 4- सार्वजनिक स्थानों के प्रभारी प्रवेश द्वार पर सुस्पष्ट स्थान पर धूम्रपान निषेध के बोर्ड लगाएंगे। बोर्ड पर प्रभारी, जिसके पास उल्लघंन की शिकायत की जानी है उनके फोन नम्बर लिखे हों। प्रभारी उल्लंघन करने वाले पर कार्रवाई नहीं करता है, तो उस पर व्यक्तिगत अपराधों की संख्या के समतुल्य जुर्माना लगाया जाएगा।

2. केवल 30 कमरों से ज्यादा वाले होटल, तीस व्यक्तियों से ज्यादा बैठने की क्षमता वाले भोजनालय एवं एयरपोर्ट में कानूनी प्रावधानों के अनुसार अलग स्मोकिंग जोन बनाया जा सकता है। धारा 6 ए- 18 वर्ष से कम आयु वर्ग को तंबाकू बेचना भी अपराध है।

3. ब्रिकी के स्थान पर धूम्रपान निषेध बोर्ड लगाना आवश्यक है। धारा 6 बी - शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू पदार्थ बेचना अपराध है। धारा 4 व धारा 6- नियमों के उल्लंघन पर 200 रुपए तक जुर्माना किया जा सकता है। धारा 5- सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध

कारावास तक की सजा

व्यक्तिगत अपराधी के लिए 200 रुपए। स्वामी, प्रबंधक या अधिकृत अधिकारी के लिए, सार्वजनिक स्थलों में अपराधों की संख्या के बराबर जुर्माना 2.5 साल की सजा या फिर 1.5 हजार रुपए तक का जुर्माना। खुदरा बिक्री पर 1 से 2 साल की सजा 1 से 3 हजार रुपए तक का जुर्माना। जुर्माना 200 रुपए से 10 हजार रुपए तक का है। 1 से 5 वर्ष की कैद से दंडित किया जा सकता है।