गंजबासौदा/होशंगाबाद। होशंगाबाद और विदिशा जिले के गंजबासौदा में स्वर्ण स्याही से हस्तलिखित गुरुग्रंथ साहिब उपलब्ध हैं। दोनों जगह ये ग्रंथ आस्था के बड़े केंद्र हैं। माना जाता है कि गुरुनानक देवजी की मौजूदगी में ये ग्रंथ लिखे गए थे। होशंगाबाद में वर्ष 1973 में नर्मदा नदी में आई बाढ़ के दौरान मंगलवारा इलाके में एक मकान से लकड़ी का बॉक्स पानी में बहता दिखा था। उसमें यह गुरुग्रंथ मिला था। तबसे सिख समाज के लोगों ने इसे संभालकर रखा। होशंगाबाद के गुरुद्वारे के ज्ञानी हरभजन सिंह के मुताबिक यह गुरुग्रंथ गुरुदेव जी की हाजिरी में कीरतपुर में लिखा गया था। इस गुरुग्रंथ की यहीं नियमित अरदास की जाती है।

गुरुनानक जी का शिष्य बन गया था राजा होशंगशाह

इतिहासकारों ने उल्लेख किया है कि वर्ष 1418 में गुरुनानक देव जी होशंगाबाद आए थे। तब यहां का तत्कालीन शासक होशंगशाह भी उनके ज्ञान से प्रभावित होकर उनका शिष्य बन गया था।

नांदेड़ से गंजबासौदा लाए थे गुरुग्रंथ साहिब

गंजबासौदा के युवा सिख समाज के अध्यक्ष विजय अरोरा के मुताबिक यहां गुरुद्वारे में हस्तलिखित गुरुग्रंथ साहिब हैं। समाज के संतोष कपूर बताते हैं कि 335 वर्ष पूर्व उनके पूर्वज महाराष्ट्र के नांदेड़ से हस्तलिखित गुरुग्रंथ साहिब लाए थे। घर के कक्ष में ही छोटा-सा गुरुद्वारा बनाकर गुरुग्रंथ साहिब को स्थापित किया था।

तबसे अब तक इसकी अरदास करते आ रहे हैं। ग्रंथ को सहेज कर रखा गया है, ताकि उसमें लिखे गुरुवाणी के शब्दों को नष्ट होने से बचाया जा सके। पंजाबी समाज के चरणजीत सिंह छाबड़ा के मुताबिक देश के विभिन्न् शहरों के अलावा विदेशों से भी ज्ञानी यहां आकर इस हस्तलिखित गुरुग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं। पूर्व नपा उपाध्यक्ष हरीश खत्री के अनुसार डेरा बाबा बूढ़ा साहिब के ज्ञानी और संत बीबी जसविंदर कौर भी गंजबासौदा आकर इस ग्रंथ की प्रामाणिकता सत्यापित कर चुकी हैं।

Posted By: Hemant Upadhyay