खिरकिया। नवदुनिया न्यूज

17 सितंबर को पितृपक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या है, इसे सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि पर उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर्म किए जाते हैं, जिनकी मृत्यु तिथि मालूम नहीं है। साथ ही इस बार अगर किसी मृत सदस्य का श्राद्ध करना भूल गए हैं, तो उनके लिए अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं। ज्योतिषाचार्य पं. देवेंद्र शर्मा के अनुसार इस अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के पिंडदान आदि शुभ कर्म करना चाहिए। मान्यता है कि पितृ पक्ष में सभी पितर देवता धरती पर अपने-अपने कुल के घरों में आते हैं और धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। अमावस्या पर सभी पितर अपने पितृलोक लौट जाते हैं।

कल से शुरू होगा अधिकमास

इस साल पितृ पक्ष की अमावस्या के बाद यानी 18 सितंबर से अधिमास शुरू हो रहा है। इस वजह से नवरात्रि पूरे एक माह देरी से आएगी। अगले महीने 17 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होगी। 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक मलमास का योग है। शास्त्रों के अनुसार मलमास में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। जानकारी के अनुसार जब दो पक्षों में संक्रांति नहीं होती तब अधिमास होता है, जिसे मलमास या फिर खरमास करते हैं। यह स्थिति 32 माह और 16 दिन में होता है। लगभग हर तीन वर्ष बाद मलमास का संयोग बनता है।

शुभ कार्य करना वर्जित

मलमास या पुरुषोत्तम मास एक ऐसा मास है। जिसमें शास्त्रानुसार कोई भी शुभ एवं मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। इस माह में शादी- विवाह, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। कुछ जगहों पर इसे अधिमास के नाम से भी जाना जाता है। पंचांग के अनुसार इस साल 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिमास का योग है। अधिमास में पढ़ने वाली शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी को पद्मनी तथा परमा एकादशी कहा जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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