तीन वर्ष में एक बार आती है पुरुषोत्तमी एकादशी

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केप्शन- कथा का वाचन करते हुए पंडित तरूण तिवारी।

होशंगाबाद। अधिकमास में अनेक धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी है। जिसमें अनेक महिलाओं के समूह द्वारा ब्रह्म मुहूर्त में नर्मदा जी में स्नान व प्रातःकाल ही भगवान की आराधना अधिकमास की कथा आदि कार्यक्रम हो रहे हैं। पं. तरूण तिवारी ने बताया कि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पुरुषोत्तमी एकादशी व महाभारत में इस एकादशी का नाम समुद्रा एकादशी है। यह एकादशी तीन वर्ष में एक बार आती है। इस दिन भगवान श्रीराधा-कृष्ण व श्री हरि व माता महालक्ष्मी व शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पूरे वर्ष की एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। अधिकमास में यह व्रत आने से यह और भी खास हो जाता है। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठर को इस एकादशी का महत्व बताया था।

पं. तिवारी ने बताया कि पुराणों में बताया गया है कि पुरुषोत्तमी एकादशी किसी यज्ञ, किसी तप और किसी दान से कम नहीं है। व्रत करने से सभी तीर्थों और यज्ञों का फल मिल जाता है। जाने-अनजाने में हुए सभी पापों से भी व्यक्ति मुक्त हो जाता है। इस एकादशी पर दान का खास महत्व होता है। लोग इस दिन मसूर की दाल, चना, शहद, पत्तेदार सब्जियां और पराया अन्ना ग्रहण नहीं करते हैं। साथ ही इस दिन नमक भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। खाना कांसे के बर्तन में भी नहीं खाना चाहिए। व्रती अपने उपवास के दौरान कंदमूल या फल खा सकते हैं।

मंदिरों में भी हुई विशेष उपासनाः शहर के मंदिरों में इस विशेष एकादशी के अवसर पर अनेक धार्मिक अनुष्ठान हुए, जिसमें पुरुषोत्तम मास की कथा का वाचन, भगवान श्री हरि का पूजन अभिषेक आदि अनेक कार्यक्रम किए गए। जिसमें मंदिर के महंत पंडित पुजारी व श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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