होशंगाबाद नर्मदा नदी के सेठानीघाट सहित अन्य तटों पर इन दिनों आचमन करने लायक जल नहीं बचा। दशहरे पर देवी प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद सफाई न होने से यह स्थिति बनी है। नर्मदा के सभी घाटों पर जहां-तहां प्रतिमाओं के अवशेष बिखरे हुए हैं। शरद पूर्णिमा पर स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालु भी परेशान हुए।

उल्लेखनीय है कि तीन दिनों तक प्रशासन व पुलिस की मौजूदगी में नर्मदा में प्रतिमाएं विसर्जित की गई थीं। तटों की सफाई के लिए नपा के 20 कर्मचारी तैनात थे, लेकिन सफाई ठीक से नहीं की गई। सर्वाधिक प्रतिमाएं सेठानीघाट, विवेकानंद घाट, पोस्ट ऑफिस घाट पर विसर्जित की गई थीं।

सेठानीघाट पर मलबा अधिक होने से पानी में धार बंद हो गई। यहां प्रतिदिन आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि किनारों पर आचमन करने लायक जल भी नहीं बचा है। यहां का पानी बिना ट्रीटमेंट के पीने लायक नहीं है।

प्रतिमाओं में उपयोग किए गए रासायनिक रंगों के घुलने से कई तटों पर पानी का रंग बदल गया है। कुछ जगह रुका पानी काला हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में नर्मदा जल को दूषित बताया था। इसके बावजूद जिम्मेदारों ने प्रतिमा विसर्जन के समय इसका ध्यान नहीं रखा।

क्षारीय हो चुका पानी

कई जगह नर्मदा के पानी में क्लोराइड और घुलनशील कार्बन डाईऑक्साइड अधिक है। इसका अर्थ है कि पानी क्षारीय हो चुका। भारतीय मानक संस्थान ने पेयजल का पीएच 6.5 से 8.5 तक का तय कि या है। इससे स्पष्ट है कि कई जगह नर्मदा का पानी पीने योग्य नहीं है। प्रदूषित पानी पीने से पेट संबंधी बीमारी भी हो सकती है। जलीय जीवों को भी खतरा है। नर्मदा के पानी की गुणवत्ता ए-ग्रेड की नहीं रही।

-डॉ. ओएन चौबे, प्राचार्य, नर्मदा महाविद्यालय होशंगाबाद

सफाई करा रहे हैं

सेठानीघाट सहित अन्य घाटों से मलबा हटाने के लिए नगरपालिका के 20 कर्मचारियों को लगाया है। हम इसे अभियान के तौर पर ले रहे हैं। अवशेष व मलबा जल्द हटा लिया जाएगा।

- अखिलेश खंडेलवाल, नपाध्यक्ष, होशंगाबाद

Posted By: Hemant Upadhyay