होशंगाबाद, नवदुनिया प्रतिनिधि। Hoshangabad News वह न बोल पाती थी, न सुन पाती थी, दिमागी हालत भी ठीक नहीं थी। बीमारी के कारण छह साल पहले पति ने भी किनारा कर लिया था। रविवार शाम बुदनी में घर जाने के लिए पटरी पार कर रही थी और ट्रेन के इंजन में फंस गई। इंजन भागता रहा और महिला के शरीर का एक-एक हिस्सा चिंदी-चिंदी होकर बिखरता रहा।

सात किलोमीटर तक उसके चीथड़े उड़ते रहे। ट्रेन जब होशंगाबाद पहुंची तब उसके शव का बचा हुआ हिस्सा निकलवाया गया। जो सही-सलामत घर जाना चाहती थी, पोटली में बंधकर उसका शरीर घर पहुंचा। जिस ट्रेन से वह डरकर भागती थी, उसी के इंजन में उसकी अंतिम यात्रा निकली।

जीआरपी चौकी प्रभारी प्रमोद पाटिल के मुताबिक रविवार शाम बुदनी निवासी आशा पुत्री रमेश चौहान (28) पटरी पार कर घर जा रही थी। शाम तकरीबन सात बजे यात्री ट्रेन की चपेट में आने से उसका शव ट्रेन के इंजन की कपलिंग जाली में फंस गया और तकरीबन सात किमी तक घिसटता गया। परिजनों का कहना है कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त थी और सुनने-बोलने में भी असमर्थ थी।

स्टेशन मास्टर एचएस तिवारी ने बताया कि मौके पर पहुंचकर शव को निकलवाया। पीएम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। महिला के पिता रमेश चौहान भाजपा से दो बार पार्षद रह चुके हैं। आशा की शादी 2014 में हुई थी। लगातार बीमार रहने के कारण वह मायके में ही रहती थी। जीआरपी चौकी होशंगाबाद में मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

Posted By: Hemant Upadhyay