आशीष दीक्षित, नर्मदापुरम (होशंगाबाद)। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के घने जंगल में एक बाघिन अपने दो नन्हें शावकों को दुलार देने के साथ ही कुशल शिकारी बनने के गुर भी सिखा रही है। बाघिन और दो शवक एसटीआर के गश्ती दल को नजर आए हैं। बाघिन के बारे में बताया जा रहा है कि अपने इलाके से बाहर भी शावकों को ले जाकर शिकार करने के दाव-पेंच सिखा रही है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को बाघों के घर के रूप में जाना जाता है। यहां पर बाघों की गणना भी शुरू हो चुकी है। बाघिन पुरानी रहवासी है या पुरानी फिलहाल इस बात की जानकारी अब तक सामने नहीं आ सकी है। एसटीआर के क्षेत्र संचालक एल कृष्णमूर्ति के मुताबिक बाघिन जिस तरह से शावकों के साथ बैठी हुई नजर आ रही है। जिससे स्पष्ट हो रही है कि वह शावकों को दुलार कर रही है वहीं दूसरे ही पल में शावक बाघिन के जबड़े के पास जाता दिख रहा है।

एसटीआर से प्राप्त जानकारी के अनसार बाघिन एक कुशल शिकारी होने के साथ ही मां भी होती है। छोटे शावकों को जंगल का शानदार व कुशल शासक बनाने के लिए वह उनके साथ रहती है, जबकि शावकों का पिता ज्यादा समय तक उनके साथ नहीं रूकता है। डेढ़ साल तक बाघिन अपने शावकों को जंगल की हर बारीकी से अवगत कराती है।

पर्यटकों को आकर्षित कर रहा एसटीआर

बाघ देखने के लिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र को सबसे उपयुक्त स्थाना माना जाता है। बाघों के संरक्षण के लिए यहां पर बेहतर काम किया जा रहा है। बोरी, चूरना, मढ़ई, पचमढ़ी, नीमघान में वनकर्मियों को गश्त पर लगाया गया है। बाघ के इलाके में किसी भी तरह का मूवमेंट होने की जानकारी भी वन अमला रख रहा है।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की सुविधा के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को बाघ नजर आ रहे हैं।

- एल कृष्णमूर्ति, क्षेत्र संचालक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व

Posted By: Ravindra Soni

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