नर्मदापुरम, नवदुनिया प्रतिनिधि।

जिले में इस बार सबसे अधिक मूंग की बोवनी का रिकार्ड बना हुआ है। जिले में 2 लाख 32 हजार हेक्टेयर में मूंग की फसल लहलहा रही है। पूर्व में जिन किसानों की बोवनी हो गई थी उनकी फसल पकने की स्थिति में हैं। जिनकी बोवनी बाद में हुई है उनकी फसल पकने से पूर्व ही पीलिया रोग से ग्रसित हो रही है। इस रोग को लेकर किसानों में चिंता व्याप्त है। क्योंकि रोग लगने से फसल तेजी से खराब हो रही है। रोग का किसान एक कारण यह भी बता रहे हैं कि मूंग की फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण भी पीले पत्ते होकर फसल खराब हो रही है, जिससे पैदावार पर असर पड़ेगा। लगातार तेज गर्मी के असर के कारण भी अब मौसम में आए बदलाव का असर पड़ रहा है।

किसानों ने की कड़ी मेहनत

क्षेत्र में गर्मी के मौसम में किसानों की कड़ी मेहनत के चलते अभी एक सप्ताह पूर्व तक मूंग की फसल लहलहा रही थी। जिसमें फल्ली में दाने का भराव तेजी से हो रहा था, लेकिन अचानक पीलिया रोग लगने से अब किसानों को नुकसान होना शुरू हो गया है। मूंग में पीलिया रोग यलो मौजेक होने से पौधों के पत्ते पीले होते जा रहे हैं। किसानों ने बताया कि यह रोग लगने पर मूंग के एक पौधे में होने से पूरे खेत में फैल जाता है। जिससे फसल खराब हो जाती है। यह अभी शुरूआत ही है, लेकिन अनेक खेतों में तेजी से फैल रहा है। जिसके कारण किसान परेशान हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि इसी तरह मूंग की फसल में रोग फैलता रहा तो पसल बर्बाद हो जाएगी।

बढ़ता जा रहा रोग

किसान लक्ष्मण गौर ने बताया कि क्षेत्र के अधिकांश खेतों में मूंग की फसल को पीलिया ने अपनी चपेट में ले लिया है। मेरी खुद की पांच एकड़ फसल में पीले पत्ते नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस रोग के चलते पैदावार नाम मात्र की रह जाती है। यह रोग शुरू होने के बाद बढ़ता ही जा रहा है।

किसानों के पास नहीं कोई इलाज

पीलिया रोग का कोई उपचार नहीं होने से किसान लाचार नजर आ रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक खेत में मूंग के एक या चारण पांच पौधों के पत्ते पीले होते दिखाई दे ंतभी उन पौधों को उखाड़ कर मिट्टी में दबा देना चाहिए ताकि रोग अन्य पौधों में नहीं फैल सके तथा मोनो प्रोटोफास 36 ईसी एक लीटर पानी में 2 एमएल के हिसाब से मिलाकर खड़ी फसल में स्प्रे करना चाहिए। किसानों का कहना है कि यह नुस्खा तो वे कई बार दोहरा चुके हैं इससे कोई फायदा नहीं मिलता है।

एक सप्ताह से ही शुरू हुआ रोग

किसान गणेश गौर, किरण तिवारी, अवधेश शर्मा ने बताया कि अभी तक तो फसल ठीक थी लेकिन अचानक एक सप्ताह में ही यह रोग फैल रहा है, जिससे फसल को नुकसान हो रहा है। अब जितनी पैदावार की उम्मीद लगाए हुए थे उससे कम होगी। इस बीमारी के कारण पीले पत्तों वाले पेड़ को उखाड़ने में ही समय लगाना पड़ रहा है। इसके लिए मजदूर भी लगाने पड़ रहे हैं।

नियंत्रण में लाया जा सकता है

मूंग की फसल पकने की स्थिति में है। डोलरिया तहसील क्षेत्र के कुछ किसानों से पता चला है मूंग की फसल के पत्ते पीले पड़ रहे हैं, देखने पर यह दलहनी फसल में यलो मौजेक रोग जैसा ही है। फसल में पकाव के दौरान इस तरह के रोग की संभावना बनती है। पीले पत्ते वाले पौधे को हटाने व स्प्रे करने से कुछ हद तक नियंत्रण में लाया जा सकता है।

- डा एके त्रिपाठी, कृषि विज्ञानी, नर्मदापुरम

Posted By: Nai Dunia News Network

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