बलराम शर्मा, नर्मदापुरम। मानसूनी वर्षा की शुरूआत होने के बाद अब नर्मदापुरम संभाग में खरीफ मौसम की बोवनी शुरू होने वाली है। संभाग में वर्तमान में सोयाबीन, धान, मक्का, मूंग, उड़द, अरहर, कोदो कुटकी सहित अन्य खरीफ फसलों के लिए खाद की जरूरत पड़ेगी। बोवनी के साथ ही किसानों को प्रमुख रूप से यूरिया, डीएपी,एसएसपी, पोटास आदि खादों की आवश्यकता शुरू हो गई है। संभाग के तीनों जिले नर्मदापुरम, हरदा, और बैतूल के लिए 2 लाख 65 हजार 51 टन खाद की जरूरत है। जिसमें सबसे ज्यादा यूरिया 1 लाख 24 हजार टन और डीएपी 82 हजार टन चाहिए। ये दोनों ही प्रमुख खाद हैं। वर्तमान में यूरिया का भंडारण 71 हजार 153 टन और डीएपी का 48 हजार 595 टन ही भंडारण है। सोसायटियों में पूर्ति नहीं होने के कारण किसानों को मजबूरी में निजी क्षेत्र से खाद की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

शुरू होने लगी बोवनीः किसानों के द्वारा धीरे-धीरे बोवनी शुरू की जा रही है। बांकी के किसानों को बीज के साथ ही खाद की जरूरत है। सोसायटियों में मांग के अनुरुप खाद की उपलब्धता कम है। एक बार फिर किसानों को निजी व्यापारियों के हाथों ठगाने को मजबूर होना पड़ेगा। किसानों को मंहगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी सोसायटियों में यूरिया और डीएपी कम मात्रा में है। जिससे किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है। धान और सोयाबीन दोनों के साथ ही अन्य खरीफ फसलों के लिए डीएपी की तत्काल आवश्यकता है। किसानों को तो समय पर बोवनी करना है। इसलिए सोसायटियों के चक्कर लगा कर थकने के बाद निजी क्षेत्र के व्यापारियों से खाद लेनी पड़ रही है।

संभाग के जिलों में भंडारण की स्थिति

1.नर्मदापुरम जिला : नर्मदापुरम जिले में यूरिया का लक्ष्य 48 हजार टन है। भंडारण 28 हजार 81टन ,डीएपी का लक्ष्य 40 हजार, भंडारण 22 हजार 691,टन है।

2.हरदा जिलाः हरदा जिले में यूरिया लक्ष्य 28 हजार टन, भंडारण 12 हजार 178 टन, डीएपी का लक्ष्य 3 हजार.टन, भंडारण 8 हजार 254 टन है।

3.बैतूल जिलाः बैतूल जिले में यूरिया का लक्ष्य 48 हजार टन, भंडारण 30 हजार 894 टन, डीएपी का लक्ष्य 18 हजार टन, भंडारण 18 हजार 155 टन है।

हर वर्ष होती है खाद की किल्लत

किसान नेता शिवमोहन सिंह, केशव साहू, गणेश गौर, सुदीप पटेल और लखन गौर का कहना है कि खाद के लिए हर साल परेशानी होती है। शासन को पहले ही पता चल जाता है कि जिले में किसानों को कितना खाद और कितना बीज चाहिए। उसकी व्यवस्था सोसायटियों के माध्यम से करनी चाहिए। बीते कुछ वर्षों से किसानों को खाद के समय बहुत परेशान किया जाता है। सोसायटियों में लेटलतीफी की जाती है। इस कारण किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार निजी क्षेत्र से खाद लेना पड़ता है। भले ही मंहगा मिले तब भी किसान समय पर अपनी पूर्ति करते हैं। शासन स्तर से सोसायटियों को उपलब्ध करानी चाहिए।

मानसूनी वर्षा शुरू होने के साथ ही खरीफ बोवनी की शुरूआत होने लगती है। किसानों ने तैयारी शुरू कर दी है। विभागीय स्तर से खाद-बीज की व्यवस्था की जा रही है। संभाग में खाद-बीज का लक्ष्य तय करने के साथ ही खाद-बीज की उपलब्धता की जा रही है। वर्तमान में किसानों की आवश्यकतानुसार वितरण किया जा रहा है। मानसून समय पर आ गया है। वर्तमान में उपयोग के हिसाब से पूर्ति है। बाद में भी खाद आती जाएगी, किसानों को उपलब्ध कराई जाती रहेगी।

- बीएल बिलैया, संयुक्त संचालक कृषि, नर्मदापुरम संभाग

Posted By: Nai Dunia News Network

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