बलराम शर्मा। नर्मदापुरम

नर्मदापुरम जिले को प्रकृति ने भरपूर सौंदर्य प्रदान किया है। जिससे अनेक स्थल पर्यटन के रूप में विकसित हुए हैं। जिले में हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। पचमढ़ी, मढ़ई तो विश्व पटल पर प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा नर्मदा तट का सेठानी घाट किसी बड़े पर्यटन स्थल से कम नहीं हैं। क्योंकि यहां पर ही लाखों पर्यटक आते ही हैं। दूसरे अन्य स्थलों में बांद्राभान नर्मदा और तवा नदी के संगम स्थल के कारण तथा नदी महोत्सव के रूप में एक बड़ा पर्यटन स्थल बन चुका है। प्राचीन आदमगढ़ की पहाड़ी, तिलक सिंदूर, आंवली घाट, नर्मदा हर्बल पार्क और भीलट देव का स्थान भी पर्यटकों को लुभाता है। जिले में आने वाले लाखों पर्यटकों से करोड़ों का करोबार होता है। इतना जरूर है कि वर्ष 2015 में स्थानीय स्तर की समिट में जो वादे हुए थे उन पर पर्यटन के क्षेत्र में प्रयास हो जाते तो इस क्षेत्र में पर्यटन को और अधिक बढ़ावा मिल सकता था।

जिले में व्यापक संभावनाएं: जिले में पर्यटन उद्योग की व्यापक संभावनाएं हैं। नर्मदा, तवा, देनवा, पलकमति, हथेड़ सहित अन्य अनेक नदियों का पावन तट, सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला जैसी हरी भरी वादियां, यहां की प्राकृतिक खूबसूरती और विशेषताएं पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। पर्यटन विभाग ने क्षेत्र के पर्यटन स्थलों को अपेक्षित रूप से भले ही विकसित नहीं किया हो लेकिन पर्यटक सपरिवार बार-बार पहुंचते हैं। जिससे इस क्षेत्र में अनेक तरह से व्यवसाय बढ़ता है।

विशाल व प्रसिद्ध सेठानी घाटः सेठानी घाट देश के सबसे बड़े घाटों में शामिल है। सेठानी घाट का निर्माण 19 वीं शताब्दी में सेठानी जानकीबाई ने कराया है। घाट की लंबाई 800 मीटर से अधिक है 40 फीट ऊंचाई तक घाट पर सीढ़ियां हैं। 10 फीट तक सीढ़ियां नदी में डूबी रहती हैं। घाट की विशेषता है कि मां नर्मदा की जलधारा हमेशा ही घाट को छूती है। प्रतिदिन सैकड़ों और वर्ष भर में लाखों लोग यहां आते हैं। पूर्णिमा व अमावस्या पर हजारों लोग पहुंचते हैं।

-नर्मदा-तवा का संगम स्थल बांद्राभान-

मुख्यालय से 7 किमी दूर नर्मदा तवा का संगम स्थल बांद्राभान है। प्राचीन काल से तपस्वियों और अब पर्यटकों के लिए काफी आकर्षक है। प्राकृतिक दृष्टि से भी यह स्थान अद्भुत है। दो नदियां और बीच में तथा दोनों ओर पर्वत श्रृंखला व घने जंगल शुद्ध जलवायु प्रदान करते हैं। कार्तिक में मेला लगता है। शासन की ओर से पांच बार नदी महोत्सव हुए हैं। यहां की प्राकृतिक सौंदर्यता और आस्था के कारण कई आश्रम बने हैं। इनमें विदेशी भक्त राधामुनि आश्रम भी शामिल है।

प्राचीन आदमगढ़ की पहाड़ीः प्राग ऐतिहासिक काल से आदि मानव का आश्रय रही आदमगढ़ की शैलाश्रय पहाड़ी भी पर्यटन स्थल है। जहां पर आकर्षक शैलचित्र हैं। इस क्षेत्र में विकास कार्य के वादे हुए लेकिन कार्य नहीं हुए। प्राचीन पहाड़िया के पास पर्यटन की संभावना बनी हुई है।

वर्जन-

पर्यटन के क्षेत्र में जिले में अनेक कार्य हो रहे हैं। पचमढ़ी, मढ़ई तथा अन्य स्थानों पर लगातार कार्यक्रम जारी रहते हैं, जिससे पर्यटकों का भी मनोरंजन होता है। क्षेत्र के लोगों का जुड़ाव होता है। पर्यटन के क्षेत्र में अनेक कार्य किए जा रहे हैं। पर्यटन को बढ़ाने की जो कोशिश हो सकती है। वह की जाएगी। शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजे जाएंगे।

मनोज सरियाम,अपर कलेक्टर

Posted By: Nai Dunia News Network

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