नर्मदापुरम (नवदुनिया प्रतिनिधि)। आषाढ़ माह की एकादशी के अवसर पर संत शिरोमणी रामजी बाबा समाधि स्थल पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। रामजीबाबा द्वारा जीवित समाधि लेने के छह माह बाद आषाढ़ माह की एकादशी के अवसर पर समाधि को खोल दिया था। तब रामजी बाबा के अनुयायियों ने उनके दर्शन किए थे। तब बाबा ने अपनी वाणी का आखरी पेज लिखा था। उसके दूसरे दिन बाबा ने उनसे तब कहा था कि अब इस समाधि को बंद कर दो इसके बाद कभी मत खोलना। करीब 400 वर्ष पूर्व समाधिस्थ हुए संत शिरोमणी रामजी बाबा की समाधि पर उसके बाद से हर वर्ष एकादशी के दूसरे दिन द्वादशी पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। कोरोना काल में सिर्फ पूजन अर्चन और बाबा को भोग लगाया गया था।

यह बात समाधि के डा विजय महंत ने चर्चा के दौरान कही। उन्होने बताया कि बाबा के अनेक चमत्कार के कारण ही आज यहां पर प्रदेश के 25 जिलों से अधिक स्थानों से उनके भक्त एक दिन पूर्व ही आकर डेरा डाल चुके थे। भक्तों के द्वारा समाधि स्थल पर पूजन अर्चन किया गया। दिनभर भजन कीर्तन होते रहे। दोपहर में आरती के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसादी ग्रहण की। कई लोग अपने बच्चों के साथ पहुंचे और समाधि पर माथा टेककर बच्चों की नजर उतरवाई। समाधि पर अखंड ज्योति कई वर्षों से प्रज्जवलित है। समाधि के दर्शन करने के लिए दिन भर लंबी लंबी लाइन लगी रही।

जय महाराज से गूंजा परिसर

बाबा के पीढ़ियों के महंत परिवार उनके रिश्तेदार सहित अन्य श्रद्धालुओं द्वारा बाबा को जय महाराज के नाम से संबोधित किया जाता है। ये लोग आपस में भी जय महाराज से ही अभिवादन करते हैं। समाधि पर आज पूजन अर्चन के साथ ही भंडारे के दौरान जय महाराज के जय घोष से समाधि परिसर गूंज उठा। हालाकि शहर के सभी लोग रामजी बाबा के नाम से जानते हैं।

चने की भाजी और बल्लर के फोल का भोग

महंत ने बताया कि जब बाबा समाधि नहीं लिए थे उस समय करीब 400 वर्ष पूर्व उनको जो भोजन प्रिय लगता था उसमें चने की भाजी के साथ बल्लर के सूखे हुए फोल की सब्जी और रायता के साथ रोटी पसंद थी। इसके साथ ही सहित अन्य स्वदेशी खाद्यान्य की लेते थे। इसी बात को ध्यान में रखकर उनके भक्तों के द्वारा बाबा के पसंदीदा व्यंजनों का भोग लगाया गया। इतना ही नहीं उसी भोग वाली सामग्री का ही भंडारे में वितरित की गई। इस मौके पर प्रदेश के कई जिलों से श्रद्धालु आए, जिनमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल,सीहोर, छिंदवाडा, खरगोन, निमाड़, रतलाम, विदिशा, सहित अन्य अनेक जिलों के तथा ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आए हुए थे। शाम को ये सभी श्रद्धालु भजन कीर्तन में शामिल हुए।

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