आशीष दीक्षित, नर्मदापुरम। कहते हैं पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं। यह मुहावरा सिद्ध कर दिखाया है नर्मदापुरम के होनहार खिलाड़ी यश दुबे ने। महज पांच साल की उम्र से खिलौने के बैट से खेलने वाले यश ने धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए मप्र की क्रिकेट टीम में जगह बनाई और अब अपने दमदार प्रदर्शन की बदौलत मध्य प्रदेश की टीम को रणजी ट्राफी के इतिहास में पहली बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल करने में अहम योगदान दिया। भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी राहुल द्रविड की खेल शैली को अपनाने वाले यश मप्र टीम की दीवार बनकर उभरे हैं। यश के प्रदर्शन को लेकर नवदुनिया ने उनके पिता आरके दुबे व मप्र जूनियर सिलेक्शन समिति के सदस्य व नर्मदापुरम के कोच अनुराग मिश्रा से बातचीत की।

हाथ पकड़कर लेकर गए थे मैदान पर

यश के पिता आरके दुबे पेशे से इंजीनियर रहे हैं। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि हर खिलाड़ी का सपना होता है कि वह देश की टीम से खेले। यश भी इसी सपने को पूरा करने में लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि पांच साल की उम्र से ही यश का रुझान क्रिकेट की ओर था। वे बचपन में क्रिकेट मैदान लेकर जाते थे। जब तक यश खेलता तो वे मैदान में रहते थे। यश को खेलता देख लगने लगा था कि वह बेहतर खिलाड़ी बनेगा। नर्मदापुरम अकादमी में लेकर पहुंचा तो वहां उसने अभ्यास शुरू किया। अंडर 14 टीम में जगह बना ली।

अनुशासित खिलाड़ी है यश

मप्र जूनियर चयन समिति के सदस्य व नर्मदापुरम के कोच अनुराग मिश्रा ने बताया कि यश बचपन से ही होनहार खिलाड़ी रहा है। उसका शुरू से ही लक्ष्य रहा है कि बेहतर प्रदर्शन करना है। वह अनुशासित खिलाड़ी है। मप्र टीम में चयन के लिए भी उसने कड़ी मेहनत की है। अंडर 14 में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ ही उसने अंडर 15, अंडर 19 के साथ ही अन्य फारमेट में भी श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है।

दूसरे विकेट के लिए की थी रिकार्ड साझेदारी

मिश्रा ने बताया कि महाराजा यशवंत राव ट्राफी में उज्जैन के खिलाफ हुए मैच में दूसरे विकेट के लिए 450 रन की साझेदारी की थी। यह एक रिकार्ड है जो अब तक यश के नाम पर है। इस रिकार्ड के बाद उसने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। खेलते समय काफी धैर्य पूर्वक खेलता है।

किसी भी परिस्थिति में विचलित नहीं होता यश

नर्मदापुरम में यश के साथ खेल चुके खिलाड़ियों का कहना है कि कई बार उसे विचलित करने के लिए विरोधी टीम के खिलाड़ी तरह तरह से प्रयास करते हैं, लेकिन यश का पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर रहता है। वह कभी विचलित नहीं होता। हाल ही में जब उसने 100 रन बनाए तो दोनों कान पर अपनी उंगलियां रख ली थी। इसका मतलब यह था कि चाहे कोई कुछ भी कर ले, कह ले, उसे फर्क नहीं पड़ता।

पांच साल नर्मदापुरम टीम का हिस्सा रहे गेंदबाज गौरव यादव

मप्र रणजी टीम से गेंदबाजी कर रहे मध्यम तेज गेंदबाजी गौरव यादव ने श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। गौरव नर्मदापुरम जिले की सिवनीमालवा तहसील के ग्राम बिसौनी कलां निवासी है। गौरव के पिता पेशे से किसान है। चयन समिति के सदस्य अनुराग मिश्रा ने बताया कि गौरव को उसके पिता जब अकादमी लेकर आए थे तब उन्होंने कहा था कि बार उनके बेटे से गेंद फिंकवा कर देख लें। गौरव ने जब गेंद फेंकी तो उसका प्रदर्शन देख सभी आश्चर्यचकित थे। इसके बाद उसका चयन नर्मदापुरम क्रिकेट टीम में हुआ। करीब पांच साल तक नर्मदापुरम डिवीजन से खेलने के बाद गौरव इंदौर पहुंचा। मप्र रणजी टीम में हाल ही में गौरव ने चार विकेट लिए हैं। यह उनका श्रेष्ठ प्रदर्शन है।

Posted By: Ravindra Soni

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