सोहागपुर (नर्मदापुरम), नवदुनिया प्रतिनिधि। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक पर्यटन केंद्र मई मढ़ई में इन दिनों टाइगर देखना आम बात हो गई है। पर्यटक ज्यादा रोमांचित तब होते हैं, जब वह एक से अधिक टाइगर देख लें। ऐसा ही नजारा हाल ही में सोहागपुर व्यापारी संघ के सचिव सौरभ सोनी की फैमिली ने देखा। सौरभ सोनी की फैमली ने तीन टाइगर को एक साथ देखा तो रोमांचित हो उठे। उसी दौरान रूटीन गश्‍त पर निकले डिप्टी रेंजर लाखन सिंह पटेल जिप्सी के पास से गुजर रहे थे, तभी जिप्सी के गाइड ने इशारा किया कि आगे टाइगर है तो डिप्टी रेंजर टाइगर रिजर्व के अपने अनुभव को उपयोग करते हुए अपनी बाइक को छोड़कर जिप्सी पर चढ गए।

उसी दौरान टाइगर डिप्टी रेंजर की बाइक के पास आ गए और बाइक को सूघने लगे। बाइक का जायजा लेकर टाइगर अपने रास्ते पर चले गए। बाद में डिप्टी रेंजर ने बाइक लेकर अपनी रूटीन गश्‍त पूरी की और वापस मढई पहुंच गए।

इस संबंध में पर्यटक के रूप में मढ़ई पहुंचे सोहागपुर के व्यापारी संघ सचिव सौरव सोनी ने बताया कि हमारे साथ चंद्रेश सोनी, रत्नेश सोनी सहित फैमिली के लोग थे, तभी तीन टाइगर एक साथ सामने आ गए। तीनों टाइगर के फोटो एवं वीडियो हमने अपने मोबाइल से लिए। यह पहला अनुभव था कि जब मढई में एक साथ तीन टाइगर देखने का अवसर प्राप्त हुआ।

डिप्टी रेंजर लाखन सिंह पटेल से जब इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि मैं अपनी रूटीन गश्‍ती पर था। तभी जिप्सी के गाइड ने बताया कि टाइगर आगे है तो मैंने बाइक को रास्ते पर छोड़ा और जिप्सी में बैठ गया। जब टाइगर जंगल की ओर निकल गया और मैं वापस गाड़ी के पास पहुंचने लगा तभी पुनः टाइगर वापस आए तो मैं फिर से जिप्सी में बैठ गया। टाइगर गाड़ी के आसपास घूमे और चले गए। तब मैंने अपनी बाइक उठाई और गश्‍त कर वापस मढई पहुंच गया।

इस संबंध में एसडीओ संदेश महेश्वरी से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि गश्ती के दौरान टाइगर, पैंथर, भालू आदि वन्यप्राणियों का मिलना आम बात है। हमारे स्टाफ को इसी तरह की परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाता है। डिप्टी रेंजर लाखन सिंह पटेल भी अपने अनुभव का उपयोग करते हुए जिप्सी पर चले गए। अगर जिप्सी नहीं होती तो डिप्टी रेंजर वापस हो जाते या फिर पेड़ पर चढ़ते। लेकिन पैंथर या भालू के होने पर पेड़ पर नहीं चढ़ा जाता। क्योंकि यह दोनों ही वन्य प्राणी पेड़ पर भी चल जाते हैं। विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के सामने गश्ती के दौरान ऐसे हालात बन जाते हैं।

Posted By: Ravindra Soni

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