25एचओएस10 होशंगाबाद। शहर में नर्मदा नदी पर बना सेठानीघाट का सार्वजनिक उपयोग किया जाता है। नवदुनिया।

होशंगाबाद। नवदुनिया प्रतिनिधि

नगर में नर्मदा नदी पर स्थित सेठानीघाट का उपयोग सार्वजनिक है। सेठानीघार पर शासन-प्रशासन का नियंत्रण भी है। परंतु यह बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि घाट की जमीन निजी लीज पर है। नजूल विभाग की ओर से इसकी लीज प्रत्येक तीस साल के अंतराल से जारी की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि प्रशासन इसका लीज किराया भी वसूल करता है। हाल ही में तीन लाख रुपए प्रशासन ने लीज किराया सेठानीघाट की जमीन के वारिस पं. भवानीशंकर शर्मा से वसूल किया है। पं. शर्मा बताते हैं कि हमारे पिताजी की परदादी स्व. श्रीमती जानकी देवी सेठानी ने करीब दो सौ साल पहले कराया था। यह जमीन श्रीमती सेठानी के मालिकाना हक में थी। श्रीमती सेठानी के निधन के बाद यह जमीन हमारे पूर्वजों को लीज किराए पर प्रशासन ने दी। इसका लीज किराया प्रशासन के नियमों के मुताबिक प्रत्येक तीस साल में चुकाया जाता है। सेठानीघाट का पूर्णतः उपयोग सार्वजनिक है। शासन-प्रशासन का घाट पर पूरा नियंत्रण है। नगरपालिका की ओर से यहां रैन बसेरा भवन, सुलभ शौचालय इत्यादि बनवाए गए हैं। तीज-त्योहारों पर प्रशासन की ओर से संपूर्ण व्यवस्था रहती है। यहां आयोजन संबंधी अनुमतियां भी प्रशासन से मिलती हैं।

- दो एकड़ में बना है सेठानी घाट -

सेठानी घाट का निर्माण करीब दो एकड़ जमीन पर किया गया। घाट नदी के तल से करीब पचास फीट ऊंचाई तक बना हुआ है। एक हजार मीटर लंबाई में पचास सीढ़यिां और फर्श बने हैं। हजारों लोग यहां प्रत्येक माह की पूर्णिमा पर स्थान करने पहुंचते हैं। इसके अलावा तीज-त्योहारों पर बड़ी संख्या में लोग स्नान करने आते हैं।

- खोह सुधारने दिया था जमीन का दान पत्र -

सेठानीघाट में एक दशक पूर्व बड़ी खोह हो गई थी। पूरे घाट के नीचे पानी का तेज बहाव होने के कारण करीब 50 फीट गहराई और एक हजार फीट लंबाई में खोह हो गई थी। पं. भवानी शंकर शर्मा बताते हैं कि खोह से जनहानि होने की आशंका थी। हमने प्रशासन से खोह की मरम्मत कराने की गुहार लगाई। तत्कालीन कलेक्टर फैज अहमद किदवई ने 2006 में खोह भरवाने के लिए हमसे जमीन का दान पत्र मांगा था। इस कारण हमने करीब छह हजार वर्ग फीट जमीन का दान पत्र दिया था। इसके बाद प्रशासन ने खोह भरवाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। सरकार ने 2017 में तत्कालीन कलेक्टर संकेत भोंडवे ने बड़ी कंपनी के माध्यम से खोह भराने का काम किया था।

- जमीन लीज पर देते हैं -

सेठानीघाट पूरी तरह शासन-प्रशासन की व्यवस्था तथा निगरानी में है। लेकिन इसकी जमीन लीज पर प्रत्येक तीस साल बाद दी जाती है। यह जमीन अभी भी लीज पर है और इसका लीज किराया वसूला जाता।

- आदित्य रिछारिया, एसडीएम व शहर नजूल अधिकारी होशंगाबाद।

Posted By: Nai Dunia News Network