16एचओएस10 होशंगाबाद। कान्हा से यह बारहसिंघा सतपुड़ा लाए जा रहे हैं। वि

होशंगाबाद। कान्हा से 13 बारहसिंघा रविवार को रवाना होकर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व आए जा रहे हैं। इनमें 11 तादा व 2 नर शामिल हैं। इन बारहसिंघों को बाड़े से सफलतापूर्वक निकालकर वाहन में चढ़ाए गए। इस पूरी प्रक्रिया का नेतृत्व कान्हा के क्षेत्र संचालक एल. कृष्णमूर्ति ने किया। बारहसिंघों के केप्चर ऑपरेशन के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व एवं सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा वन्यप्राणी विशेषज्ञों ने भाग लिया। राज्य पशु बारहसिंघा को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व स्थानांतरित करने के लिए भारत सरकार एवं मप्र शासन द्वारा अनुमति दी गई थी। कान्हा में 15 फरवरी को अधिकारियों तथा विषय विशेषज्ञों द्वारा बारहसिंघों को पकड़ने के लिए विशेष रूप से निर्मित बोमा का निरीक्षण किया गया एवं रणनीति तैयार की गई। इसके पूर्व भी कान्हा से 33 बारहसिंघों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व लाया गया है। बारहसिंघों को विशेष रूप से निर्मित परिवहन ट्रक में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व लाने के लिए वन्यप्राणी चिकित्सक एव उनकी टीम मौजूद रही। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन का कहना है कि कान्हा से 13 बारहसिंघों को यहां कोर एरिया में छोड़ा जाएगा। यह बारहसिंघा 17 फरवरी को मढ़ई पहुंच जाएंगे।

- बाघिन को घने जंगल में भेजने की कवायद -

बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन अपना इलाका बनाने के लिए सोहागपुर के नजदीक सियारखेड़ा के जंगल में घूम रही है। करीब साल उम्र की इस बाघिन को 27 जनवरी को सतपुड़ा के घने जंगल में छोड़ा गया था। यह बाघिन अपना इलाका बना रही है। पिछले दिनों इस बाघिन के साथ बाघ को भी छोड़ा था। बाघ मटकुली के पास इलाका बनने पहुंच गया था। जहां बाघ ने महिला का शिकार किया। इस कारण बाघ को पकड़कर चूरना के जंगल में छोड़ा गया है। अब सतपुड़ा टाइगर प्रबंधन का प्रयास है कि बाघिन को घने जंगल में भेजा जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों को जंगल में नहीं जाने की समझाइश दी जा रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network