नर्मदापुरम (होशंगाबाद) (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले के सोहागपुर में गुरुवार रात को हृदयविदारक हादसा हुआ। बहू से मिलने जाने से रोकने पर बेटे ने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी तो बाद में बेटे की मौत पर विलाप कर रहे पिता की जिंदगी दूसरी ट्रेन ने छीन ली। पिता को दूसरी ट्रेन ने तब अपने आगोश में लिया, जब वह अपने बेटे के क्षत-विक्षत श्ाव पर सिर रखकर सुध-बुध खोए हुए पटरी पर बैठे थे। शुक्रवार को बेहद गमगीन माहौल में दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया।

जानकारी के अनुसार 36 वर्षीय छोटेलाल विश्वकर्मा का पत्नी से कुछ बातों पर अनबन चल रहा था। कुछ महीने पहले उनकी पत्नी अपने मायके चली गई थीं। बहू के मायके चले जाने से छोटेलाल के पिता मोहनलाल विश्वकर्मा (60) व परिवार के अन्य बेहद नाराज थे। छोटेलाल जब कभी अपनी ससुराल जाना चाहते थे तो परिवार में विवाद होता था। गुरुवार रात को भी इसी बात पर परिवार में कहासुनी हुई।

झगड़ा इतना बढ़ा कि छोटेलाल अपनी जान देने के इरादे से घर से निकल गए। वह घर से महज 100 मीटर की दूरी से गुजर रहे रेलवे ट्रैक पर जा पहुंचे। इसके बाद रात करीब 12.30 बजे वहां से गुजर रही ट्रेन के सामने कूद गए। इस दौरान उनके श्ाव के कई टुकड़े हो गए।

बेटे की आत्महत्या की सूचना मिलने पर मोहनलाल रेलवे ट्रैक की ओर भाग दिए। वहां बेटे का क्षत-विक्षत शव देखा तो सुध-बुध खो बैठे और उस पर ही सिर रखकर फूट-फूट कर रोने लगे। वह इतनी तेज रो रहे थे कि कुछ ही दूरी पर छोटेलाल को खोज रहे उनके रिश्तेदार गुड्डू विश्वकर्मा व राधेश्याम विश्वकर्मा तक उनकी आवाज पहुंची। ऐसे में वह मोहनलाल की ओर दौड़ पड़े।

जब वे वहां पहुंचे तो वहां का मंजर देखकर स्तब्ध रह गए। इसके बाद उन्होंने मोहनलाल को ढांढस बंधाने की कोशि‍श की। इस बीच सदमे और शोक में डूबे मोहनलाल बेटे के शव के साथ ट्रैक पर ही बैठ गए। इसी बीच ट्रैक पर तेज रफ्तार दूसरी ट्रेन आ गई। खतरे से अनजान मोहनलाल को संभलने का मौका भी नहीं मिला और वह ट्रेन की चपेट में आ गए। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उनकी जिंदगी की डोर भी टूट चुकी थी। इस मामले में जीआरपी ने मामला दर्ज कर लिया है।

Posted By: Ravindra Soni

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