Voters In Indore इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नगरीय निकाय चुनावों की तैयारी शुरू हो गई है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए मतदाताओं का हिसाब-किताब जानना भी उतना ही जरूरी है। मतदाताओं के बही-खाते से दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि इंदौर शहर में हर साल औसतन 23 हजार मतदाता बढ़ रहे हैं। वर्ष 2015 में हुए नगर निगम चुनाव से लेकर अब तक इंदौर में 1 लाख 85 हजार 532 मतदाताओं का इजाफा हुआ है। ऐसे में निगम चुनाव में उम्मीदवारों को इन नए मतदाताओं तक भी वोट मांगने पहुंचना होगा।

वर्ष 2014 में मतदाता सूचियों के नवीनीकरण के समय इंदौर निगम क्षेत्र में 16 लाख 49 हजार 784 मतदाता थे। वर्ष 2015 के बाद अब सात साल बाद होने जा रहे निगम चुनाव में 18 लाख 35 हजार 316 मतदाता हो गए हैं। इसमें पुरुष मतदाता 9 लाख 36 हजार 213 हैं और महिला मतदाता 8 लाख 99 हजार 17 हैं, जबकि थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 86 है। हाल ही में मतदाता सूचियों के नवीनीकरण के दौरान निगम क्षेत्र में 4765 मतदाता जोड़े गए हैं तो 52 हजार 964 मतदाताओं को हटाया भी गया है।

हटाए गए मतदाताओं में कई ऐसे हैं जो इंदौर छोड़कर बाहर चले गए हैं और कई की मौत हो चुकी है। एक साल पहले कोरोना की दूसरी लहर में शहर के कई लोगों की मौतें भी इसमें शामिल हैं। सूचियों के शुद्धीकरण से एक बात यह भी सामने आ रही है कि नए मतदाता जुड़ने के बजाय हटाने की संख्या कहीं अधिक है।

कांग्रेस की चेतावनी- निर्वाचन अधिसूचना के पहले फर्जी नाम नहीं हटाए तो फिर जाएंगे कोर्ट

इधर कांग्रेस ने मतदाता सूची में कुछ नामों का दोहराव बताया है। साथ ही कुछ नाम फर्जी बताए हैं। इन्हें लेकर कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम निर्वाचन की अधिसूचना जारी होने से पहले यह फर्जी नाम नहीं हटाए तो हम दोबारा कोर्ट जाएंगे। इस संबंध में कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग नई दिल्ली और राज्य निर्वाचन आयुक्त मध्य प्रदेश को पत्र लिखा है। पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद भी सूची में सैकड़ों फर्जी और डुप्लीकेट नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नामों की सूची प्रमाण सहित निर्वाचन आयोग को भेजी गई है और मतदाता सूची स्थगित कर इसमें सुधार की मांग की गई है।

कौशल ने बताया कि इंदौर नगर निगम के 85 वार्डों में गैर निवासरत लगभग 80 हजार परिवारों की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर लाखों फर्जी नाम मतदाता-सूची से नहीं हटाए जाने पर उच्च न्यायलय में याचिकाएं दायर की थी। इसमें अपर कलेक्टर ने शपथ-पत्र के साथ जवाबी पत्र देकर 2 लाख 59 हजार फर्जी और डी-डुप्लीकेट नाम हटाए जाने का लेख किया है। वहीं हर विधानसभा के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों ने भी अपने अनुभाग से हटाए गए नामों की संख्या जारी की है जो 2 लाख 26 हजार है। ऐसे में 35 हजार नामों के बारे में स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है।

Posted By: Sameer Deshpande

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