Hindu New Year : रामकृष्ण मुले, इंदौर (नईदुनिया)। अब तक पंचांगों में तिथि, पर्व और व्रत पर पंचांगों में मतभेद नजर आता रहा है, लेकिन इस बार हिंदू नववर्ष के नाम पर भी मतभेद है। इसके चलते अधिकांश पंचांग में इस वर्ष का नाम प्रमादी बताया गया तो कुछ में इसका नाम आनंद मानना शास्त्र सम्मत बताया गया है। ज्योतिर्विदों के मुताबिक ऐसी स्थिति 91-92 वर्ष में एक बार बनती है, जब संवत्सर का क्षय होता है। संवत्सर के 60 नाम बताए गए हैं। इसके साथ ही इस बार 10 तिथियों पर भी मतभेद की स्थिति है। ज्योतिर्विद् विजय अड़ीचवाल ने बताया कि प्रत्येक वर्ष गुरु की गति के आधार पर संवत्सर के नाम का निर्धारण होता है। संवत्सर नाम उसी नाम के अनुरूप पूरे वर्ष का फल प्रदान करता है। लगभग 91-92 वर्ष में एक बार ऐसी स्थिति बनती है कि संवत्सर वर्ष (यानी गुड़ी पड़वा से अगले वर्ष की गुड़ी पड़वा के एक दिन पूर्व) समाप्ति के पूर्व ही संवत्सर का क्षय हो जाता है। इस बार ऐसा ही हुआ है। 47वां संवत्सर 'प्रमादी' 11 मई 2019 से प्रारंभ हुआ था, जो 6 मई 2020 को समाप्त होगा। चूंकि वर्ष आरंभ गुड़ी पड़वा 25 मार्च 2020 को 'प्रमादी' नाम संवत्सर होने से कुछ पंचांग पूरे वर्ष तक के लिए 'प्रमादी' संवत्सर मान रहे हैं, जबकि कुछ पंचांग इस संवत्सर को क्षय मानकर अगला संवत्सर नाम आनंद को मानने का तथ्य प्रकट कर रहे हैं।

किस पंचांग ने बताया क्या नाम

- निर्णय सागर पंचांग का मत है कि संवत्सर के नाम निर्धारण सूत्र के अनुसार इस वर्ष 48वां संवत्सर होता है। 48वां संवत्सर आनंद है। इस प्रकार 'प्रमादी' नाम संवत्सर मेष संक्रांति प्रवेश समय के अनुसार 14 अप्रैल 2020 को समाप्त हो जाएगा।

- काशी हिंदू विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित 'विश्व पंचांग' में दोनों संवत्सर 'प्रमादी' व 'आनंद' के वर्षफल का उल्लेख किया गया है। प्रमादी का राजा बुध और मंत्री चंद्रमा बताया गया है।

- महाकाल पंचांग अनुसार वर्षभर संवत्सर का नाम 'प्रमादी' का उपयोग करना चाहिए। उनका मानना है कि वर्ष प्रारंभ के दौरान जो संवत्सर नाम होता है, उसी नाम का ही संकल्प आदि में वर्षभर उपयोग होता है। बार्हस्पत्य गणनानुसार प्रमादी नाम का संवत्सर 6 मई 2020 को समाप्त हो जाएगा और उसी दिन से 'आनंद' नामक संवत्सर का आरंभ होगा।

इन तिथियों पर भी नजर आएगी मतभिन्नता

ज्योतिर्विद पं. ओम वशिष्ठ ने बताया कि इस वर्ष कई तिथियों पर पंचांगों में मतभिन्नता नजर आएगी। ये अवसर वैशाख कृष्ण चतुर्थी व्रत, ज्येष्ठ कृष्ण द्वादश का प्रदोष व्रत, श्रावण मास में पू्‌र्णिमा व्रत, भाद्रपद की शुक्ल अष्टम पर मनाई जाने वाली राधा अष्टमी होंगे। इसके अलावा द्वितीय अश्विन मास की दुर्गाष्टमी, द्वितीय अश्विन मास का पूर्णिमा व्रत, धनतेरस, विश्वकर्मा जयंती, होलाष्टक, शीतला सप्तमी आदि शामिल हैं।

ये हैं संवत्सर के नाम

संवत्सर के 60 नामों का उल्लेख है। इसमें प्रभव, विभव, शुक्ल, प्रमोद, प्रजापति, अंगिरा, श्रीमुख, भाव, युवा, धाता, ईश्वर, बहुधान्य, प्रमाथी, विक्रम, वृषप्रजा, चित्रभानु, सुभानु, तारण, पार्थिव, अव्यय, सर्वजीत, सर्वधारी, विरोध, विकृत, खर, नंदन, विजय, जय, मन्मथ, दुर्मुख, हेमलंबी, विलंबी, विकारी, शार्वरी, प्लव, शुभकृत, शोभकृत, क्रोधी, विश्वावसु, पराभव, प्लवंग, कीलक सौम्य, साधरण, विरोधकृत, परिधावी, प्रमादी, आनंद, राक्षस, आनल, पिंगल, कालयुक्त, सिद्धार्थी, रौद्र, दुर्मति, दुन्दुभी, रुधिरोद्ररी, रक्ताक्षी, क्रोधन, क्षय नाम शामिल हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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