जितेंद्र यादव, इंदौर Illegal Colony Indore । होलकरों की राजधानी रहे इंदौर में सरकारी जमीनों की हेराफेरी में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पता चला है कि शहर के सिरपुर तालाब से लगी 443 एकड़ जमीन करीब 58 साल पहले तक शासकीय थी, लेकिन इसके बाद वह अचानक होलकर राजवंश की महारानी उषाराजे होलकर के नाम हो गई। इसके बाद यह जमीन बिकती चली गई और आज इस पर अवैध कालोनियां उग आई हैं। समय की खोह से सालों बाद यह मामला बाहर आया है। जिला प्रशासन अब मामले की जांच करा रहा है। बाजार मूल्य के हिसाब से यह जमीन एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की है।

फौरी तौर पर जो तथ्य सामने आए हैं उससे पता चला है कि 1925 में मिसल बंदोबस्त से लेकर 1962-63 तक यह जमीन विश्रामबाग फारेस्ट के नाम से शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी। इसके बाद 1964 में अचानक इस जमीन पर उषाराजे होलकर का नाम आ गया। ताज्जुब की बात है कि शासकीय दस्तावेजों में शासकीय जमीन पर होलकर का नाम कैसे और किस आधार पर आ गया, इसका कोई प्रमाण या सरकारी आदेश नहीं? है। जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि जमीन के हस्तांतरण का कोई शासकीय आदेश हुआ है या यह जमीन की हेराफेरी का कोई मामला तो नहीं?

टुकड़ा-टुकड़ा होती गई जमीन, होते रहे अवैध निर्माण

यह जमीन शहर के फूटी कोठी और हवा बंगला रोड पर है। राजस्व रिकार्ड में इस जमीन का मूल सर्वे नंबर 525 है। बाद में यह जमीन अन्य लोगों को बिकती रही और इसी सर्वे नंबर के बटे नंबर होते चले गए। सरकारी जमीन की बंदरबांट होती रही। उषाराजे होलकर के नाम हुई यह जमीन अन्य लोगों को बिकती रही। बाद में इसी जमीन पर विदुर नगर, प्रजापत नगर जैसी कालोनियां अवैध रूप से बसती रहीं। कलेक्टर मनीषसिंह ने मामले की जांच अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर को सौंपी है। अपर कलेक्टर ने दस्तावेज जुटाने के लिए एसडीएम और तहसीलदार की टीम को लगाया है।

राजस्व रिकार्ड में सिरपुर क्षेत्र की यह जमीन पहले शासकीय थी। बाद में यह उषाराजे होलकर के नाम हो गई। शुरुआत में कुछ नाम आए और बाद में इसमें सैकड़ों नामों से बटे नंबर होते गए। इसकी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पता चलेगा कि शासकीय जमीन निजी नामों पर कैसे हो गई।

- अभय बेड़ेकर, अपर कलेक्टर

Posted By: Sameer Deshpande

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