इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। बाम्बे अस्पताल के पीछे बनी झोपड़ियों में सोमवार को आग लग गई। आग में चार परिवारों के 17 सदस्य बेघर हो गए। फायर बिग्रेड की टीम जब तक पहुंची तब तक सब कुछ जलकर खाक हो गया था।झोपडी़ में रहने वाले सभी मजदूर काम कर चले गए थे, उनके बच्चे बाहर खेल रहे थे। इसी दौरान एक झोपड़ी में डेढ़ साल की बेटी वैशाली सो रही थी, उसके पिता कैलाश और मां प्रियंका सोलंकी मजदूरी करने के लिए गई थी।

झोपड़ी में फंसी बच्ची घबराई तो उसके रोने की आवाज सुनाई दी। आग बुझाने के लिए आसपास के लोग पहुंचे तो उन्हें जलती हुई झोपड़ी में एक बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी, उसे लोगों ने जैसे-तैसे कर बाहर निकाला और उसकी जान बचाई। लोगों ने फायर बिग्रेड की टीम को भी फोन किया, लेकिन जब तक टीम पहुंची तब तक सभी झोपड़ियां जल चुकी थीं।

मजदूर राजू ने बताया कि यहां पर चार परिवार करीब 12 साल से झोपड़ियों में रह रहे हैं। सभी लोग कुक्षी के रहने वाले हैं और यहां रहकर मजदूरी करते हैं। बुधवार को सभी अपने काम पर चले गए थे। आग से घरों में रखा खाने-पीने और राशन की पूरी सामग्री उसी में रखी हुई थी। ठंड और बारिश में सिर छुपाने की भी जगह नहीं बची है। सभी को गुरुसेवा आश्रम में रखा है।

यहां पर साजन चौधरी, राजू, कैलाश और वीरेन्द्र की झोपड़ी थी। सभी बच्चों और पत्नी के साथ यहां रहते हैं। बच्चों को घर छोड़कर सुबह निकल जाते हैं। आग की झोपड़ियां जलने के बाद रहने के लिए जगह नहीं बची है। फिलहाल गुरुसेवा आश्रम में रोका है।

Posted By: Sameer Deshpande

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