Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सुरों के कद्रदान वाले इस शहर में संगीत की सभा एक बार फिर सजी। पुरानी फिल्मों के सदाबहार गीतों से सजी यह शाम माई राजोपाध्याय की स्मृति में आयोजित हुई। संस्था स्वरदा द्वारा जाल सभागृह में यह कार्यक्रम ‘यादों के झरोखे’ शीर्षक लिए आयोजित हुआ। आयोजन में लता मंगेशकर, आशा भोसले, मो. रफी, मन्ना डे, हेमंत कुमार, तलत महमूद आदि गायकों के गीत सुनाए गए।

इसमें मुख्य स्वर सपना केकरे व राजेंद्र गलगले के थे। कार्यक्रम की शुरुआत सपना और राजेंद्र की जोड़ी ने ‘सोच के ये गगन झूमे’ गीत सुनाकर किया। युगल जोड़ी ने इस गीत के बाद ‘दिले बेताब को सिने से लगाना होगा’ गीत सुनाया। एकल और युगल प्रस्तुति वाले इस आयोजन में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत सुनाए।

गीतों की महफिल को आगे बढ़ाते हुए सपना ने ‘ना जिया लागेना, मोरे नैना बहाए नीर, कहे झूम-झूम रात ये सुहानी’ आदि गीत सुनाकर खूब दाद बटोरी। गायक राजेंद्र गलगले ने ‘तुझे क्या सुनाऊ मैं दिलरुबा, दिन ढल जाए, तेरे नैना तलाश करे’ गीत सुनाकर मंत्र मुग्ध कर दिया। अतिथि गायक के रूप में उपस्थित दिलीप कवठेकर ने ‘जिंदगी कैसी है पहेली, खोया-खोया चांद’ सुनाकर महफिल में चार चांद लगा दिए। माई राजोपाध्याय की स्मृति में हुए इस आयोजन में उनकी बेटी विद्या किबे ने भी बेहतरीन गीत प्रस्तुत किए। उनके द्वारा प्रस्तुत गीत अजीब दास्तां है ये, मौसम है आशिकाना’ आदि गीतों को भी श्रोताओं ने खूब सराहा।

विद्या और दिलीप की जोड़ी ने ‘अच्छा जी मैं हारी, कोरा कागज था’ गीत सुनाकर कार्यक्रम को अलग ही रंग में रंग दिया। आयोजन में हर मूड के गीत सुनाए गए जिन्होंने श्रोताओं को अपने से बांधे रखा। सुरों की इस महफिल का समापन सपना व राजेंद्र ने ‘फिर मिलोगे’ गीत गाकर किया। संगीत संयोजन अभिजीत गौड़ का था। संगतकार के रूप में लोकेश उपाध्याय, अचिन जाधव, सुमीत मालवीय और हिमांशु थे। कार्यक्रम का सधा हुआ संचालन मोना ठाकुर ने किया।

Posted By: Sameer Deshpande

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