इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हर एक सीढ़ी हमें अगली सीढ़ी की ओर ले जाती है। कदम-कदम बढ़ाकर ही हम कामयाबी की तरफ बढ़ते हैं। मेरा मानना है कि चाहे शरीर हो या करियर लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए, हमें सीढ़ी को ही चुनना चाहिए। मुझे मिली सफलता, प्यार और अपनेपन की भी यही वजह है। मुझे जितना आनंद, ज्ञान लोगों से मिलकर मिलता है, शायद वह कहीं और नहीं मिल सकता। जब हम लोगों से हुई मुलाकात का आनंद लेना शुरू करते हैं तो जिंदगी खूबसूरत बन जाती है।

यह बात अभिनेता विद्युत जामवाल ने नईदुनिया के साथ हुई खास मुलाकात में कही। मंगलवार को विद्युत अपनी आगामी फिल्म ‘खुदा हाफिज चैप्टर - अग्नि परीक्षा’ के प्रमोशन के लिए अभिनेत्री शिवालिका ओबेराय और फिल्म के लेखक व निर्देशक फारुक कबीर के साथ आए थे। इंदौर आगमन पर उन्होंने अपने प्रशंसकों से भी मुलाकात की। विद्युत कहते हैं कि मैं एक शहर से इस इंडस्ट्री में आया था अब देश का हो गया हूं, यह निखार नहीं तो और क्या है। जो वक्त के साथ खुद में निखार नहीं लाए वह व्यकि्त कैसा! मेरा यकिन खुद को साबित करने में नहीं है बलि्क मैं यह मानता हूं कि खुद को साबित करने की कोशिश में हम सीखने से पीछे रह जाते हैं। जहां तक बात चुनौती की है तो मेरे लिए चुनौती खुद पर यकीन करने की है। जब खुद पर विश्वास हो जाता है तो फिर कुछ मुशि्कल नहीं लगता। खुद पर विश्वास करने के लिए बेहतर होता है कि आप उनसे दूर हो जाएं जो आपको कम आंकते हों।

मुझे मेकअप करना ज्यादा पसंद नहीं है - शिवालिका

शिवालिका ओबेराय फिल्म से जुड़ी बातों को साझा करते हुए कहती हैं कि मैंने इस फिल्म में कई दृश्यों के लिए बिल्कुल भी मेकअप नहीं किया। इसकी दो वजह थी- पहली यह कि मुझे मेकअप करना ज्यादा पसंद नहीं और दूसरी उन दृश्यों में मेकअप की मांग भी नहीं थी। मैं मनोविज्ञान की भी छात्रा रह चुकी हूं और उसका लाभ मुझे अभिनय की दुनिया में मिल रहा है। बेहतर अभिनय के लिए हमें मनोभावों को समझना जरूरी है जो मैं बेहतर ढंग से कर पाती हूं। मेरा मानना है कि बेहतर समाज के निर्माण के लिए हर व्यकि्त को एक-दूसरे के मनोभाव को समझते आना चाहिए। इसलिए स्कूली शिक्षा में छोटी कक्षाओं से ही मनोविज्ञान की शिक्षा भी दी जाना चाहिए। फारुक कबीर फिल्म से जुड़ी खास बात को साझा करते हुए कहते हैं कि इसमें गीत-संगीत के जरिए भारतीय संस्कृति, सभ्यता को दर्शाने का प्रयास किया। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के गीतों का फिल्मांकन पहले हुआ जबकि गीत बाद में बने।

Posted By: Hemraj Yadav

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close