Indore Abhishek Chendke Column अभिषेक चेंडके, इंदौर, नईदुनिया। कभी टीम गौड़ के सिपहसालार रहे शंकर यादव का कांग्रेस में मन नहीं लगा। जब भाजपा में थे तो छोटी अयोध्या में अपनी उपेक्षा से नाराज रहते थे। कमल नाथ सरकार आई तो विधायक जीतू पटवारी उन्हें हाथ पकड़ कर कमल नाथ के सामने ले गए और कांग्रेस की सदस्यता दिलवा दी। यादव की किस्मत इतनी खराब कि कांग्रेस में जाने के महीने भर बाद ही सरकार गिर गई और भाजपा फिर सत्ता में आ गई। यादव जितने भी समय कांग्रेस में रहे, कभी गांधी भवन की सीढ़ी नहीं चढ़े। कुछ समय पहले चार नंबर विधानसभा क्षेत्र में एक धार्मिक आयोजन हुआ था, जब यादव संघ और भाजपा नेताओं के साथ पाए जा रहे थे, तब से यह कयास लगाए जा रहे थे कि शंकर कभी भी 'घर वापसी' कर सकते हैं। थोड़ा और जल्दी आते तो भाजपा में उनका पार्षद टिकट भी पक्का हो जाता।

रूठे कार्यकर्ताओं को मनाएं कैसे

चुनाव के समय कार्यकर्ताओं के 'आराम की मुद्रा' में रहने का खामियाजा पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा उठा चुकी है, इसलिए इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। नगर सरकार चुनाव (नगर निगम) के समय भी कार्यकर्ताओं में वैसा उत्साह नहीं है, जैसे बड़े नेता उम्मीद लगाए बैठे थे। यह फीडबैक जैसे ही भोपाल पहुंचा तो संगठन महामंत्री हितानंद खुद दो दिन के लिए इंदौर आ गए और छहों विधानसभा क्षेत्रों में जाकर कार्यकर्ताओं की क्लास ले ली। मुख्यमंत्री की इंदौर यात्रा में भी कार्यकर्ता सम्मेलन का अचानक कार्यक्रम जुड़ गया। उन्हें भी कार्यकर्ताओं को हाथ में सुपारी रखवाकर भाजपा को सफल बनाने का संकल्प दिलवाना पड़ा। बड़े नेताओं से मिले टानिक के बाद पुरुष कार्यकर्ता तो काम पर लग गए, लेकिन महिला मोर्चा की कई बहनें अब तक रूठी हुई हंै। टिकट कटने का गुस्सा अभी तक उतरा नहीं है। उन्हें कैसे मनाएं, इसके उपाय खोजे जा रहे हैं।

कहां गए पीले वाहन

नगर निगम के कई अफसरों को वाहनों की सुविधा दी गई है। शहर में होने वाले अस्थायी अतिक्रमणों पर निगरानी के लिए भी अफसर इन वाहनों में बैठकर बाजारों में घूमते हैं। इन वाहनों का रंग पीला है। चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अपने भाषणों का एक अध्याय इन वाहनों पर भी समर्पित करते हैं। उन्होंने वाहनों को पीली गैंग नाम दिया है। चुनावी मुद्दा बनने के बाद लोग भी महसूस कर रहे हैं कि सड़कों पर आजकल ये पीले वाहन कम दिखाई दे रहे हैं। राजवाड़ा, मालवा मिल, फ्रूट मार्केट जैसे मार्गों पर पीले वाहन में सवार होकर कर्मचारी सड़क घेरने वालों को हटाते दिख जाते हैं। अफसरों की चाकरी, घर पहुंच सेवा, रौब जमाने के लिए इन वाहनों का उपयोग गाहे-बगाहे होता था, लेकिन चुनाव के चलते ये वाहन निर्वाचन काम में लगा दिए गए हैं।

कांग्रेस से पत्नी, भाजपा से भांजी मैदान में

बाणगंगा का यादव परिवार दोनों दलों में तगड़ी दखल रखता है। भल्लू यादव पार्षद भी रहे और एक नंबर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी बने। एक बार विधानसभा चुनाव में दीपू यादव भी कांग्रेस से टिकट लेकर आए थे। दो बार वे अपनी पत्नी विनितिका के लिए नगर निगम चुनाव में कांग्रेस से पार्षद का टिकट ले आए, लेकिन इस बार तो उनकी भांजी शिवांगी यादव को भाजपा ने दो नंबर विधानसभा क्षेत्र के क्लर्क कालोनी वार्ड से अपना उम्मीदवार बनाया है। शिवांगी के पिता वीरेंद्र यादव लंबे समय से विधायक रमेश मेंदोला से जुड़े हुए हैं और डेढ़ साल से वार्ड में टिकट के लिए फिल्डिंग जमा रहे थे। उधर दल अलग-अलग होने के कारण दीपू अपनी भांजी की सार्वजनिक रूप से तो मदद नहीं कर सकते, लेकिन दो नंबर विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले रिश्तेदार, यादव समाज के परिवार चुनाव में पूरा समय दे रहे हैं।

Posted By: Sameer Deshpande

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