नवीन यादव, इंदौर। प्रदूषण नियत्रंण बोर्ड ने पहली बार एक्शन प्लान बनाकर शहर की आबोहवा सुधारने का प्रयास किया है। कई अन्य विभागों को शामिल कर एक विस्तृत एक्शन प्लान बनाया है, जिसमें लांग टर्म, मिड टर्म और शार्ट टर्म योजना बनाई गई है। इस प्लान को मंजूरी के लिए एनजीटी के पास भेजा गया है। अगर सब प्लान के हिसाब से रहा तो शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 60 तक पहुंच जाएगा।

बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक इंदौर में अभी औसत एक्यूआई 85 से 90 के बीच में रहता है। अब दो नए सेंटर बनने के बाद यह और सटीक आ जाएगा। पिछले करीब तीन सालों से प्रदूषण पर नियत्रंण रखा हुआ है, लेकिन अब विस्तृत योजना बनाकर इसे कम करने का प्रयास किया जा रहा है। इस एक्शन प्लान में परिवहन विभाग, नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, एआईसीटीएसएल और खाद्य विभाग को भी शामिल किया गया है। पिछले दिनों हुई बैठक में भी इस संबध में चर्चा हुई थी। अब इस पर काम किया जाएगा।

यह है प्रमुख प्लान

-परिवहन विभाग 15 साल पुराने वाहनों को बाहर करेगा, हालांकि शासन द्वारा नियम बनाकर ऐसा करवाया जाएगा। इसके लिए 12 माह का समय निर्धारित किया गया है।

- परिवहन और एआईसीटीएसएल मिलकर लोक परिवहन को सीएनजी में कन्वर्ट करेंगे।

- परिवहन विभाग अगले एक साल में 300 पीयूसी सेंटर खोलने के लिए अनुमति देगा।

-ट्रैफिक पुलिस आरएलवीडी कैमरों की संख्या बढ़एगी। ट्रैफिक के लिए सेंट्रल सिस्टम बनेगा। इसके लिए अगले 6 माह का समय निर्धारित किया गया है।

-नगर निगम नए फ्लायओवर सहित 12 नई मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण करवाएगा। इसके अलावा कंस्ट्रक्शन साइट को कवर करवाना और सड़कों पर से धूल हटवाने के लिए लगातार प्रयास करेगा। इसके लिए 1 से 4 साल तक समय दिया गया है।

-परिवहन विभाग अगले 2 साल में शहर से (भारत स्टेज) बीएस 2 और बीएस 3 के डीजल वाहनों को बंद करेगा।

-नगर निगम शहर के लेफ्ट टर्न चौड़े करेगा।

-इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन जिला प्रशासन की मदद से स्थापित किए जाएंगे।

-अगले 6 माह में शहर से 40 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होगा।

यह है पिछले 8 सालों के पीएम 10 की स्थिति

2011 135.46

2012 144.17

2013 140.67

2014 143.18

2015 98.35

2016 94.57

2017 79.09

2018 83.21

किया जा रहा है प्रयास

शहर की आबोहवा सुधारने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। सभी विभागों की मदद से यह पूरा हो सकेगा। अगर ऐसा होगा तो इंदौर प्रदेश के सबसे अच्छी आबोहवा वाला शहर हो जाएगा।

-डॉ. डीके वाघेला, मुख्य प्रयोगशाला अधिकारी