इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। माघ मास की अमावस्या 31 जनवरी सोमवार और 1 फरवरी मंगलवार को दो दिन रहेगी। इसके चलते वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या का संयोग 31 जनवरी को बनेगा जबकि 1 फरवरी को मंगलवार होने से भौमवती अमावस्या होगी। इस अवसर पर पितृ पूजन, स्नान, दान का विशेष महत्व है। सोमवती का संयोग बनने से शिव मंदिर में विशेष अनुष्ठान होंगे। वर्ष 2022 में तीन बार सोमवती अमावस्या का संयोग बनेगा।

अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 जनवरी को दोपहर 2.18 बजे से होगी जो अगले दिन मंगलवार को दोपहर 11.15 बजे तक रहेगी।ज्योतिर्विद् विनायक बड़वे के मुताबिक जब अमावस्या सोमवार को आती है तो उसे सोमवती और शनिवार को आने पर शनि अमावस्या कहते हैं।

सोमवती और शनि अमावस्या का विशेष महत्व माना गया है। सोमवती पर शिव और शनि अमावस्या पर शनिदेव की आराधना विशेष फलदायी मानी गई है।इस वर्ष सोमवती अमावस्या का संयोग तीन बार बन रहा है। इसमें 31 जनवरी, 30 मई और 26 सितंबर शामिल है। शनि अमावस्या वर्ष मेें दो बार आएगी। यह 30 अप्रैल और 27 अगस्त को रहेगी। ज्योतिर्विद् देवेंद्र कुशवाह के मुताबिक इस बार तिथियों का अनूठा संयोग बन रहा है।

अमावस्या सूर्य अस्त से पहले दोपहर में लगने से सोमवती और अगले दिन उदया तिथि में अगले दिन होने से अमावस्या का लाभ दो दिन मिलेगा। इस मौके पर कंबल, गुड़, तिल, मिठाई, भोजन, गोशाला में गायों को चारा देना लाभदायक माना गया है। इसके साथ ही पितरों की सद्गति के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ कर सूर्यदेव और पीपल को अर्घ्य देकर उसका पुण्य फल अपने पितरों को अर्पण करना चाहिए।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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