इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कथक की समृद्ध परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए आरंभ कत्थक स्टूडियो द्वारा ‘कथक कीर्तन’ श्रृंखला चलाई जा रही है। इस श्रृंखला के सातवें पड़ाव के तहत शहर के कलाकारों ने इस बार उज्जैन में प्रस्तुति दी। शास्त्रीय और उपशास्त्रीय प्रस्तुति को लिए इस आयोजन में एकल, युगल और समूह नृत्य प्रस्तुत किए गए। आयोजन में संस्थान की पांच वर्षीय शिष्या श्रेयांशी महाजन ने गुरु वंदना से कार्यक्रम का श्रीगणेश किया। शुद्ध कथक के इस प्रस्तुति के बाद उपशास्त्रीय प्रस्तुति निशा व ऐश्वर्या ने दी। इन्होंने युगल नृत्य प्रस्तुत करते हुए होली की सतरंगी छटा दर्शाई।

प्रस्तुति का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए प्रतिभा हलदर ने ताल रूपक में ताल पक्ष को दर्शाया। भाव पक्ष के बाद ताल पक्ष वाली यह प्रस्तुति भी खूब सराही गई। आर्या बूले और भार्गवी जोशी ने ताल त्रिताल में कथक नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद शास्त्रीय नृत्य को ही चुनते हुए अंबिका मालवीय ने ताल झपताल में शुद्ध कथक नृत्य के साथ भाव पक्ष के अंतर्गत कलहंरिता नायिका को प्रस्तुत किया। आयोजन में रिशिका राणा की प्रस्तुति सर्वाधिक पसंद की गई। इन्होंने तराना व चतुरंग प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।

हर उम्र की शिष्याओं ने दी प्रस्तुतित - कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए समूह नृत्य के अंतर्गत उप शास्त्रीय नृत्य में प्रकृति को दर्शाते हुए तराने के साथ रिद्धिमा ने अपने साथी कलाकारों के साथ नयनाभिराम प्रस्तुति दी। राधिका ने साथी कलाकारों के साथ समूह नृत्य किया। शुद्ध कथक के जरिए इन कलाकारों ने तत्कार, थाट, आमद और तराने के साथ कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम में हर उम्र की शिष्याओं ने प्रस्तुति देते हुए अपनी साधना का परिचय दिया। दमयंती भाटिया मिरदवाल के दिशा-निर्देशन में दी गई इन प्रस्तुतियों में हारमोनिमय व गायन में मयंक स्वर्णकार ने साथ दिया। तबले पर मृणाल नागर ने संगत की। इस अवसर पर खासी संख्या में दर्शक उपसि्थत थे। कार्यक्रम का सधा हुआ संचालन संगीता परमार ने बखूबी किया।

Posted By: Hemraj Yadav

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