Ashoknagar News: अशोकनगर। उपसंचालक पशु चिकित्सा विभाग के सहायक ग्रेड 3 राकेश यादव को 6500 रूपये की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस की टीम ने रंगे हाथों गिरफतार किया है। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपित के विरूद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम 2018 में हुए संशोधनों की धारा 7 के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।

बगुल्या निवासी हरिराम रघुवंशी पशु परिपालक कृत्रिम गर्भाधान केन्द्र फरदाई के द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी जिसके बाद लोकायुक्त पुलिस द्वारा फरियादी को एक टैप रिकार्ड भी दिया गया था। जिसमें बाबू राकेश यादव द्वारा 7 हजार रूपये की मांग की गई थी और 6500 रूपये देना तय हुआ था। 8 अप्रैल को ग्वालियर में आकर यह शिकायत की थी तथा 9 अप्रैल को लेन-देन की बातचीत टैप की गयी थी।

जिसके बाद लोकायुक्त पुलिस की टीम गुरूवार को दोपहर 12.20 बजे अशोकनगर पहुंची और पशु चिकित्सालय के बाहर एक इलेक्ट्रिक की दुकान पर फरियादी ने बाबू को बुलाकर जैसे ही रूपये दिये वैसे ही बाबू ने लोकायुक्त की टीम को देखकर रूपये जमीन पर फैंक दिये। लोकायुक्त की टीम ने उक्त रूपये उठवाकर हाथ धुलाये तो पानी गुलाबी हो गया।

फरियादी का कहना था कि उसके द्वारा जीपीएफ फंड की राशि निकालने के लिए एक लाख रूपये का फार्म भरा गया था जिसमें 7 हजार रूपये की मांग बाबू के द्वारा की जा रही थी। जिसमें 70 हजार रूपये निकालने की बात की गयी थी। इसके पहले भी उन्हों ने फार्म भरा था तब एक लाख रूपये का फार्म भरा गया था और 60 हजार रूपये की राशि बैंक खाते में आयी थी जबकि कागजों में 80 हजार रूपये की राशि निकलना बताई गयी है। 20 हजार रूपये कहां गये यह बात समझ नहीं आयी। इससे पहले भी जब-जब उन्होंने राशि निकाली तब तब बाबू के द्वारा हेराफेरी की गयी है। जिसके कारण उसे लोकायुक्त पुलिस का सहारा लेना पडा।

लोकायुक्त टीम ग्वालियर की ओर से निरीक्षक कविन्द्र सिंह चौहान, बृजमोहन नरवरिया और दो शासकीय कर्मचारी जिनमें एक डाक्टर और एक प्रोफेसर है उन्हें ग्वालियर से लेकर अशोकनगर पहुंचे थे जिनकी उपस्थिति में पूरी कार्यवाही की गयी।इस दौरान निरीक्षक बृजमोहन नरवरिया ने बताया कि आरोपित के पास से 500 रूपये के 13 नोट जो कुल मिलाकर 6500 रूपये की राशि होती है बरामद की गयी है।

यह कार्यवाही इलेक्ट्रिकल्स की दुकान पर पशु चिकित्सा कार्यालय के बाहर बाबू को बुलाकर की गयी। कविन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि पूर्व में लोकायुक्त टीम द्वारा अशोकनगर में 10 से 12 मामले दर्ज किए जा चुके है। उन्हों ने बताया कि हमारे द्वारा मामले तैयार कर विभाग से भेज दिया जाता है किन्तु शासन स्तर से इसमें तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे है। अधिकांश मामलों में न्यायालय से सजा हो चुकी है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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