इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। दुष्कर्म के मामले में फंसे विधायक पुत्र करण मोरवाल को जिला न्यायालय से राहत नहीं मिल सकी। उसने जमानत के लिए याचिका दायर की थी जिसे न्यायालय ने निरस्त कर दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपित का कृत्य गंभीर प्रकृति का है। उसे जमानत का लाभ दिया गया तो समाज में अच्छा संदेश नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि बड़नगर के कांग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के बेटे करण के खिलाफ महिला पुलिस थाने में दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज है। आरोप है कि करण ने शादी के नाम पर एक महिला से दुष्कर्म किया था। प्रकरण दर्ज होने के बाद करण फरार हो गया था। उसकी गिरफ्तारी पर इनाम भी घोषित था। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

आरोपित ने जमानत के लिए जिला न्यायालय में याचिका दायर की थी। विशेष न्यायाधीश चारुलता दांगी के न्यायालय में इसकी सुनवाई हुई। एजीपी जयंत दुबे ने अभियोजन की तरफ से पैरवी करते हुए तर्क रखा कि आरोपित ने एक महिला की अस्मिता को तार-तार किया है। उसके द्वारा किया गया कृत्य गंभीर है। उसे जमानत का लाभ दिया जाता है तो समाज में अच्छा संदेश नहीं जाएगा। फरियादी महिला की तरफ से भी जमानत याचिका का विरोध किया गया। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को सुनने के बाद जमानत देने से इन्कार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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