इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बायपास पर नायता मुंडला में सैटेलाइट हिल्स कालोनी में करीब नौ साल पहले बिके भूखंडों पर ही बैंकों ने 110 करोड़ रुपये का ऋण दे दिया था। इस कालोनी में प्रशासन अब बैंक के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यह ऋण कालोनाइजर कैलाशचंद्र गर्ग ने लिया था। भूमाफिया रितेश उर्फ चंपू अजमेरा और गर्ग के विवाद में फंसी इस कालोनी में प्रशासन पीड़ितों को उनका अधिकार दिलाना चाहता है, लेकिन इसमें बैंक ऋण और चंपू-गर्ग का लेनदेन का विवाद आड़े आ रहा है।

उल्लेखनीय है कि भूमाफिया चंपू अजमेरा और कैलाशचंद्र गर्ग की भागीदारी वाली इस कालोनी में चंपू ने कई भूखंड पहले ही बेच दिए थे, लेकिन बाद में गर्ग ने इन्हीं बिके हुए भूखंडों पर यूको बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और कार्पोरेशन बैंक से 110 करोड़ का ऋण ले लिया। बैंकों ने उसी जमीन पर इतना बड़ा ऋण दे दिया जिसमें भूखंडों की रजिस्ट्री पहले ही खरीदारों को की जा चुकी थी। वर्ष 2015 में बैंकों ने ऋण की वसूली के लिए सरफेसी एक्ट के तहत तत्कालीन अपर कलेक्टर सुधीर कोचर की कोर्ट में केस लगाया, लेकिन उन्होंने बैंकों का यह केस खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने इस कालोनी में पीड़ितों को उनके भूखंड का कब्जा दिलाने की तैयारी की तो बैंक अधिकारी अपना ऋण वसूलने के लिए फिर सक्रिय हुए हैं। बैंक अधिकारी अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर से लगातार मिल रहे हैं, लेकिन उन्होंने पुराने केस के आधार पर उन्हें लौटा दिया। अपर कलेक्टर के अनुसार अब इस मामले में कालोनाइजरों के अलावा जिम्मेदार बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

कल भूखंडों का कब्जा दिलाने की तैयारी - गर्ग और चंपू के बीच सुलह नहीं होने के बाद भी प्रशासन ने सैटेलाइट हिल्स में 60-70 भूखंड खरीदारों को उनके भूखंड का कब्जा देने की तैयारी की है। अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर ने बताया कि सोमवार को भूखंड का कब्जा दिया जाएगा। गर्ग के लिए यह अंतिम मौका है। यदि गर्ग ने पीड़ितों को भूखंड का कब्जा नहीं दिया तो अब उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Hemraj Yadav

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