राघवेन्द्र बाबा, इंदौर। पंचम की फैल में शुक्रवार शाम एक अनूठी बरात निकली। इसमें बराती, डीजे, बैंड सबकुछ आम बरातों की तरह था, बस दूल्हा इंसान के बजाय बरगद का पेड़ था। जहां-जहां से भी यह बरात निकली, लोग कौतूहल से इसे देखते रहे। अमर टेकरी पहुंचने पर पीपली के पेड़ के पालक माता-पिता ने बरात का स्वागत किया। बाद में बरगद और पीपली के पेड़ की शादी करवाई गई।

बरात में 200 से ज्यादा लोग शामिल हुए। घोड़े पर एक लड़का बरगद के पेड़ की प्रतिकृति लेकर बैठा था। शादी के लिए बाकायदा पत्रिका छपवाकर बंटवाई गई। तीन दिनों तक हल्दी-मेहंदी की रस्म हुई और मंडप सजाए गए। बरगद का पेड़ पंचम की फैल में सामुदायिक स्कूल के पास और पीपली का पेड़ अमर टेकरी में एक घर के पास लगा था।

पति की निशानी थी, आज कर दिया ब्याह

दूल्हे की तरफ से आयोजक मुन्नाीबाई ने बताया उनके पति स्व. देवतादीन वर्मा ने सालों पहले बरगद का पेड़ लगाया था। उनकी मौत के बाद से हमने पेड़ की देखभाल की। बरगद सालों से रोता था। रात को रोने की आवाज भी आती थी तो दिन में उसके आंसू (दूध और पानी) नीचे बैठे लोगों पर गिरते थे। जब बुजुर्गों से पूछा तो उन्होंने बताया कि उसकी शादी करवानी होगी। तलाश की तो पता चला कि आधा किलोमीटर दूर एक घर में पीपली माता का पेड़ है। वह भी रोती है। फिर हमने रिश्ता दिखवाया और कुंडली का मिलान करवाकर दोनों का ब्याह करवाया।

बेटी की तरह किया विदा

अमर टेकरी की आशा बाई ने बताया उन्होंने 32 साल पहले पीपली का पेड़ लगाया था। वह भी रोती थी। दिन में कई बार उसमें से पानी गिरता था। जब हमारे पास शादी का रिश्ता आया तो हमने स्वीकार कर लिया और बेटी की तरह पीपली को विदा किया।

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