इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मार्च मध्य से इंदौर में पलटकर आई कोरोना महामारी की दूसरी लहर अब भी जारी है। करीब डेढ़ महीने से शहर और अस्पतालों में हाहाकार मचा हुआ है। अस्पताल में बेड, आक्सीजन और रेमडेसिविर अब भी नाकाफी हैं, लेकिन ऐसा लग रहा है कि अब व्यवस्था को दम लेने लायक राहत मिली है। विशेषज्ञों का कहना है कि 10-15 दिन बाद और राहत की संभावना है। इस बीच आक्सीजन की आपूर्ति और अस्पतालों में बेड की उपलब्धता पहले से सुधरी है। गंभीर मरीजों की संख्या कुछ कम होने से भी ऐसा हुआ है। इसके बावजूद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को अभी अपनी तैयारियों को पुख्ता करने की जरूरत है।

हालात का आकलन करें तो अप्रैल के शुरुआत में शहर के मरीजों को करीब 100 टन आक्सीजन लग रही थी, लेकिन 50-60 टन भी मुश्किल से मिल पा रही थी। अब आक्सीजन की जरूरत भले ही 130 टन पर पहुंच गई, लेकिन गुजरात और अन्य जगह से लिक्विड आक्सीजन की आपूर्ति हमने 100 से लेकर 110 टन तक बढ़ा ली है। साथ ही पीथमपुर में मित्तल स्टील कंपनी का बंद पड़ा आक्सीजन प्लांट शुरू करने से यहां से भी इंदौर सहित आसपास के जिलों को करीब 3 हजार सिलिंडर मिलने लगे हैं। दूसरी तरफ अस्पतालों में बेड की उपलब्धता भी बढ़ी है।

कैंसर अस्पताल में 100 बेड के अलावा चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में भी 80 बेड कोरोना मरीजों के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। एमवाय अस्पताल में करीब 300 बेड का इंतजाम कर लिया गया है। जरूरत पड़ने पर इनका भी उपयोग किया जाएगा।

रेमडेसिविर अब भी संजीवनी बूटी, 5 हजार की जरूरत, मिल रहे हजार-दो हजार

अस्पतालों में बेड की उपलब्धता भले ही बन गई हो, लेकिन कोरोना के गंभीर मरीजों को लगने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की अब भी किल्लत है। शहर की जरूरत रोज 5 हजार इंजेक्शन की है, लेकिन हजार-दो हजार ही मिल रहे हैं। किसी दिन इतने इंजेक्शन भी नहीं मिल पा रहे हैं। सप्ताह में दो-तीन दिन ऐसे भी निकलते हैं कि कंपनियों से स्टाकिस्टों या डिपो पर कोई स्टाक नहीं आ पाता। किल्लत तो अपनी जगह है ही, दूसरी तरफ से कालाबाजारी भी हो रही है। यह कालाबाजारी अस्पतालों के अंदर से लेकर बाहर तक है। नकली रेमडेसिविर बनाने वाले भी पकड़ा रहे हैं। इस तरह रेमडेसिविर दवा को लेकर हालात हर तरफ बिगड़े हुए हैं। सरकार अब तक इसकी समुचित आपूर्ति बहाल नहीं करवा पाई है।

विशेषज्ञों की राय

आईसीयू की कमी तो अब भी बनी हुई है, लेकिन आक्सीजन की उपलब्धता बढ़ने से एमआरटीबी, एमटीएच आदि शासकीय अस्पतालों में आक्सीजन बेड अब मिलने लगे हैं। सरकारी अस्पतालों में जिन मरीजों को रेमडेसिविर की जरूरत है, वह उपलब्ध कराया जा रहा है। इंदौर में अगले 15 दिन में कोरोना की इस लहर वेव का असर कम होने की संभावना है। - डा. सलिल भार्गव, प्रोफेसर और रेस्पिरेटरी मेडिसिन के प्रमुख, एमजीएम मेडिकल कालेज

एक सप्ताह पहले आक्सीजन बेड मिलना मुश्किल ही नहीं, असंभव हो रहा था। पर अब स्थिति सुधरी है। बेड के लिए इन्क्वायरी आना भी बंद हो गई है। बेड की प्रतीक्षा सूची भी कम हुई है। इंदौर में लाकडाउन का यह फायदा हुआ है। गंभीर मरीजों की संख्या घटी है। आने वाले दो सप्ताह में हालात और सुधरेंगे। - डा. हेमंत जैन, शिशु रोग विशेषज्ञ और चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के प्रभारी

Posted By: Prashant Pandey

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