Indore News: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। ब्रिटिशकाल में इंदौर के जिस क्षेत्र में अंग्रेज रहा करते थे, उस रेसीडेंसी एरिया को अब देश की आजादी में बलिदान देने वाले महाराणा बख्तावर सिंह के नाम से पहचाना जाएगा। इसके अलावा रामसर साइट की सूची में शामिल शहर के सिरपुर तालाब को अब अहिल्या सरोवर के नाम से पहचाना जाएगा। स्वर कोकिला लता मंगेशकर की प्रतिमा गांधी हाल परिसर में लगाई जाएगी। ये सारे निर्णय सोमवार को नगर निगम इंदौर की मेयर-इन-काउंसिल (एमआइसी) की बैठक में किए गए।

202 साल बाद रेसीडेंसी क्षेत्र की पहचान बदली जा रही है। इस क्षेत्र में ज्यादातर अधिकारियों के बंगले बने हुए हैं। सोमवार को एमआइसी की बैठक में 550 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को वित्तीय स्वीकृति भी प्रदान की गई। इसमें 300 करोड़ की लागत से जलूद में सोलर पावर प्लांट को भी मंजूरी मिली। जलूद पंपिंग स्टेशन के पास 60 मेगावाट का सौर ऊर्जा संयत्र स्थापित करने के लिए नगर निगम 305 करोड़ रुपये के ग्रीन बांड या लोन के माध्यम से राशि जुटाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में हुई एमआइसी की बैठक में परिषद के सदस्य शामिल हुए।

जिस प्रतिष्ठान में 100 से अधिक लोग, वहां सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य

बैठक में इंदौर कम्युनिटी सीसीटीवी सर्विलांस प्रोजेक्ट के मसौदे का अनुमोदन भी किया गया। इसके तहत इंदौर में सीसीटीवी कैमरों का केंद्रीकृत नेटवर्क तैयार किया जाएगा। जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में 100 से अधिक लोग होंगे वहां सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा। साथ ही 1500 वर्गफीट से अधिक के भवन, औद्योगिक, व्यावसायिक व शैक्षणिक प्रतिष्ठान, अस्पताल, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, मनोरंजन स्थल, आडिटोरियम, होटल, कार्यालय, बैंक, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व रैनबसेरा सहित प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य होगा। रहवासी टाउनशिप, हाउसिंग सोसायटी व प्रवेश मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे की अनिवार्यता होगी। सभी कैमरों को सिटी बस कार्यालय परिसर में बने इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा, ताकि पुलिस को घटना व दुर्घटना की तत्काल जानकारी मिल सके। कमांड सेंटर से करीब 50 हजार सीसीटीवी कैमरों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

कुलकर्णी नगर होगी कुलकर्णी भट्टा क्षेत्र की पहचान

दिवंगत भाजपा नेता उमेश शर्मा के नाम पर प्रकाश नगर उद्यान व शासकीय कन्या संयोगितागंज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नामकरण किया जाएगा। इसके अलावा कुलकर्णी भट्टे का नाम कुलकर्णी नगर होगा। जगत नारायण जोशी की स्मृति में स्वदेश नगर से भगतसिंह मार्ग के शुरुआत में द्वार बनेगा। कुलकर्णी भट्टे के पुल का नामकरण हरिसिंह नलवा पुल होगा। मालवा मिल चौराहे से वीर सावरकर प्रतिमा तक की सड़क का नाम महर्षि बालीनाथ महाराज के नाम पर होगा। शहीद पार्क एवं बिचौली हप्सी स्थित सिटी फारेस्ट का नाम 'शहीद अमृत विश्नोई" के नाम पर होगा।

नर्मदा व सीवरेज प्रोजेक्ट के कार्यों को स्वीकृति

बैठक में नर्मदा जलप्रदाय परियोजना मंडलेश्वर के तृतीय चरण क्षमता के 363 एमएलडी के प्लांट के तीन वर्षों के लिए संचालन-संधारण के लिए पांच करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। शहर में जलप्रदाय के लिए फीडर मेन लाइन डालने, टंकियों के निर्माण व स्काडा सिस्टम के लिए 9.21 करोड़ रुपये व इसके अलावा कान्ह नदी शुद्धीकरण प्रोजेक्ट के तहत चाणक्यपुरी से राजमोहल्ला तक प्रायमरी सीवर लाइन डालने के लिए 20.57 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को स्वीकृति दी गई।

रेसीडेंसी क्षेत्र में शामिल रहे केईएच कंपाउंड के पेड़ पर दी गई थी फांसी

धार जिले के अमझेरा के महाराणा बख्तावर सिंह ने 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था। उन्होंने भील पल्टन का भी गठन किया था। उस समय जब अंग्रेज महाराणा बख्तावर सिंह से सीधी लड़ाई में जीत न सके तो उन्हें षड्यंत्र पूर्वक पकड़ने की योजना बनाई। कर्नल डूरंड ने अमझेरा रियासत के कुछ प्रभावशाली लोगों को जागीर का लालच देकर अपनी ओर मिला लिया और महाराणा बख्तावर सिंह के पास संधि वार्ता के लिए भेजा। 11 नवंबर 1857 को संधि के लिए धार जाते समय अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेजों ने 10 फरवरी 1858 को इंदौर में वर्तमान एमवाय अस्पताल के पास स्थित केईएच कम्पाउंड में नीम के पेड़ पर महाराणा बख्तावर सिंह को फांसी दी। वह पेड़ आज भी मौजूद है और वहां पर उनका स्मारक बनाया गया है। जानकारों के मुताबिक, महाराणा का शरीर इतना भारी था कि फांसी का फंदा ही टूट गया। उस समय अगर किसी को फांसी दी जाती थी और फंदा टूट जाए तो उसे माफी दे दी जाती थी। अंग्रेजों में बख्तावर सिंह का इस कदर डर था कि उन्होंने तुरंत मजबूत फंदा बनाकर उन्हें फांसी दे दी। महाराणा बख्तावर सिंह जब बलिदानी हुए उस समय उनकी उम्र 34 साल की थी। इंदौर के केईएच कंपाउंड में जहां उन्हें फांसी दी गई थी, वह हिस्सा पहले रेसीडेंसी क्षेत्र में शामिल था। निगम के महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अनुशंसा पर रेसीडेंसी क्षेत्र का नामकरण महाराणा बख्तावर सिंह के नाम पर रखा गया।

Posted By: Sameer Deshpande

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