उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। भय्यू महाराज की मौत के छह महीने बाद भी कई सवाल अनसुलझे हैं। महाराज के कई अनुयायियों ने उनकी हत्या की आशंका जताई है। उज्जैन जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री भरत पोरवाल ने भी महाराज की हत्या की आशंका जताते हुए एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग दोहराई है। 'नईदुनिया' से चर्चा में पोरवाल ने कहा कि महाराज गोली नहीं चला सकते थे। बंदूक पकड़ने में उनके हाथ कांपते थे। कई लोग महाराज के करोड़ों रुपए दबाकर बैठे हैं, इसलिए सच्चाई बाहर नहीं आने देना चाहते। जांच को गुमराह किया जा रहा है। पत्नी-बेटी का नाम आगे कर कई लोग खुद को बचा रहे हैं।

महाराज के अनुयायी पोरवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के शपथ लेते ही उनसे भी इस केस में सीबीआई जांच की मांग की जाएगी। पोरवाल इस केस की जांच सीबीआई से कराने के लिए केंद्र तक को पत्र लिख चुके हैं। केंद्र ने इस संबंध में एक पत्र मुख्य सचिव को भी भेजा है। पोरवाल ने कहा कि महाराज ने लाखों लोगों को जीवन जीना सिखाया। मैं भी कभी परेशान होता तो वे दिशा बताते, संबल देते थे। जो इंसान लोगों को जीना सिखाता हो, वह खुदकुशी कैसे कर सकता है।

पोरवाल के मुताबिक एक बार महाराज महाराष्ट्र के किसी वन क्षेत्र से गुजर रहे थे। उनके साथ कांग्रेस नेता शरद पवार भी थे। गाड़ी खराब होने पर महाराज को उतरना था। वाहन में ही लोडेड बंदूक रखी थी मगर उसे पकड़ने के दौरान उनके हाथ कांपने लगे। यह देख पवार ने उनसे बंदूक ली थी। महाराज सीधे हाथ से सारा काम करते थे, फिर गोली बाएं हाथ से क्यों चलाई? ऐसे कई बिंदु हैं, जिन पर पुलिस को फिर से जांच करना चाहिए।

पैसों की कोई कमी नहीं थी

पोरवाल ने बताया कि महाराज कभी पैसे की ओर ध्यान नहीं देते थे। उनके कहने पर कोई भी करोड़ों रुपए दान कर सकता था। विदेश में भी उनके सैकड़ों अनुयायी थे, जो दान देने के लिए तैयार रहते थे। अगर कोई यह कह रहा है कि उन्हें महाराज ने गाड़ी दी थी, जमीन दी थी तो उसमें सच्चाई हो सकती है। महाराज किसी को भी लाखों रुपए या जमीन, गाड़ी दान दे सकते थे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं। कई बार उन्होंने छोटे किसानों-व्यापारियों को अपनी ओर से मदद देने की बात कही। महाराज के यहां बड़े-बड़े उद्योगपति, नेता हाथ जोड़कर खड़े रहते थे। पैसे की कमी जैसा कोई मुद्दा नहीं था। पोरवाल ने जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों पर संदेह जताया और कहा कि इनमें से कुछ अधिकारी महाराज के अनुयायी भी थे। पुलिस सामने आ रहे नामों और संदिग्ध हर व्यक्ति से पूछताछ करे तो सब स्पष्ट हो जाएगा।

षड्यंत्रकारी पत्नी-बच्ची का नाम ले रहे

पोरवाल ने कहा कि इस केस में महाराज की पत्नी और बेटी का नाम जबरन लाया जा रहा है। षड्यंत्रकारी लोग ऐसा कर रहे हैं। महाराज की पत्नी को महाराज की मौत से क्या लाभ मिलता? या बेटी को क्या फायदा था? बेटी तो विदेश पढ़ने जा रही थी, ऐसे में विवाद की बात भी गले नहीं उतरती।

राजनीति में आने वाले थे

पोरवाल ने दावा किया कि महाराज राजनीति में आने वाले थे। उज्जैन की एक होटल में उन्होंने कहा था कि इस बार कांग्रेस की सरकार आएगी। मैं खुद उस समय उनके साथ था। वे सत्य का साथ देते थे। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस। कई लोगों को उनका सत्य बोलना पच नहीं रहा था, इसलिए हर बिंदु पर जांच की जाना चाहिए। कई राज खुल सकते हैं। इसके लिए सीबीआई जांच जरूरी है।

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