इंदौर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। इंदौर में 28 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाली वीनू मांकड़ ट्राफी के अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को कोविड संक्रमण से बचाने के लिए खास तौर पर 'बायो बबल' सिस्टम बनाया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों की कोविड संबंधित जांच, उनके अन्य लोगों से मिलने पर प्रतिबंध, सुरक्षित तरीके से स्टेडियम के मैदान तक पहुंचने की व्यवस्था की जाएगी। इंदौर में होने वाले इस टूर्नामेंट में 6 टीमें भाग लेगी। ये टीमें देश के अन्य राज्यों की राज्य स्तरीय टीमें होगी। इन टीमों को शहर के तीन होटलों में रुकवाया जाएगा। ऐसे में तीनों होटलों में पहले बायो बबल का सेटअप तैयार किया जाएगा। इंदौर में कोविड के बाद हुए अब तक तीन टूर्नामेंट में जनवरी, फरवरी व मार्च में हो चुके हैं जिसमें बायो बबल बनाया गया था। इसके बाद अब सितंबर में चौथी बार इंदौर में बायो बबल बनाया जाएगा।

क्या होता है बायो बबल : खिलाड़‍ियों की सुरक्षा के लिए अभासी घेरा

बायो बबल का कंसेप्ट कोविड के बाद शुरू हुए क्रिकेट टूर्नामेंट में आया है। इस व्यवस्था के लिए अपोलो हास्पिटल ग्रुप को इंदौर सहित देशभर में होने वाले घरेलू टूर्नामेंट में बायो बबल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इंदौर में बायो बबल के सुपर स्पोक हेड डा. अंकुर गुप्ता के मुताबिक बायो बबल खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए आभासी सुरक्षा का घेरा होता है। इस व्यवस्था को डाक्टर, नर्स, सुरक्षाकर्मी संभालते हैं। इंदौर में बनने वाले बायो बबल में हमारे 50 लोगों का स्टाफ मौजूद रहेगा।

इस व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों, बीसीसीआई अधिकारी व अन्य ग्राउंड स्टाफ के लिए अलग-अलग बायो बबल सेटअप तैयार किया जाएगा। हमारा स्टाफ खिलाड़ियों पर निगरानी रखकर इस बात की पुष्टि करेगा कि उनसे कोई भी ऐसा व्यक्ति न मिले जिससे उन्हें कोविड संक्रमण हो की स्थिति निर्मित हो। घरेलू टूर्नामेंट में अपोलो अस्पताल ग्रुप के साथ बीसीसीआई और एमपीसीए के अधिकारियों के आपसी समन्वय से ये बायो बबल बनाए जाएंगे।

पांच से सात दिन होटल में रहना होगा क्वारंटाइन

डा. गुप्ता के मुताबिक बायो बबल की व्यवस्था के तहत टूर्नामेंट में शामिल होने वाले खिलाड़ी मैच शुुरु होने के सात दिन पहले इंदौर पहुंचेगे। उन्हें आरटीपीसीआर टेस्ट करवाकर आना होगा। इसके पश्चात वे सभी होटल के अपने-अपने कक्ष में पांच से सात दिन तक क्वारंटाइन रहेंगे। इस दौरान उनके दो से तीन बार आरटीपीसीआर टेस्ट व अन्य जांचे की जाएगी। खिलाड़ी एयरपोर्ट से जिस बस में बैठ होटल पहुंचेगे उसके चालक व स्टाफ को टीका लगा हो और कोई संक्रमण न हो इसकी जांच की जाएगी। सेनेटाइज बस ही उन्हें होटल लाएगी और वो ही खिलाड़ियों को स्टेडियम तक ले जाएगी। यदि किसी खिलाड़ी में कोविड या अन्य प्रकार का संक्रमण दिखाई देगा तो उसे तुरंत आइसोलेट किया जाएगा। तीनों हाेटलों में बायो बबल की व्यवस्था को तीन डाक्टर मानिटर करेगे। इसके अलावा सुरक्षाकर्मी भी इस बात की पुष्टि करेगे कि खिलाड़ियों से अन्य कोई बाहरी व्यक्ति न मिले। स्टेडियम में ग्राउंड स्टाफ या अन्य कोई व्यक्ति उनके संपर्क में न आए इसका मैनेजमेंट यही लोग करेंगे।

अंतराष्ट्रीय क्रिकेट की तर्ज पर घरेलू टूर्नामेंट में बनाए जा रहे है बायो बबल

अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए जो बायो बबल बनाए जाते है। घरेलू क्रिकेट में भी यह बायो बबल उसकी रेप्लिका है। टूर्नामेंट शाामिल होने वाले खिलाड़ी, अंपायर, रैफरी व स्कोरर को आरटीपीसीआर टेस्ट प्रोटोकाल का पालन करवाया जाएगा। इन्हें पहले से बुलाकर जांच के बाद होटल में रुकवाया जाएगा। ये लोग सात दिन बाद आपस में घुल मिल सकेंगे लेकिन इनका बाहरी लोगों से किसी भी तरह का संपर्क नहीं होगा। स्टेडियम के मैदान पर काम करने ग्राउंड स्टाफ व हाउसकीपिंग की भी नियमित जांच की जाएगी। ये लोगों खिलाड़ियों के समीप नहीं जाएंगे। पिछले तीन टूर्नामेंट इस व्यवस्था के तहत काफी सफल रहे थे। इस बार बीसीसीआई ने इसका प्रारुप बड़ा कर 13 घरेलू टूर्नामेंट करवाने का निर्णय लिया है। ऐसे में इंदौर में होने वाले टूर्नामेंट में बायो बबल की व्यवस्था को लागू किया जाएगा। - रोहित पंडित, सीईओ एमपीसीए

- पहला बायो बबल : साल 2020 में यूएई में हुए आइपीएल में बनाया गया था।

- वीनू मार्कड ट्राफी : 28 सितंबर से 4 अक्टूबर

- हर दिन तीन मैच : होलकर स्टेडियम, डेली कालेज व एमराल्ड हाइट्स के मैदान में

- छह टीमों में मुकाबला : प्रत्येक टीम के 20-20 खिलाड़ी इंदौर आएंगे

मैच की तारीखें

28 व 29 सितंबर, 1,2 व 4 अक्टूबर

Posted By: Prashant Pandey

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