जितेंद्र यादव. इंदौर (नईदुनिया)। मध्य प्रदेश में नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों को तलने के बाद बचा जला तेल बायो डीजल बनाने में काम आएगा। इसके लिए इंदौर में सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आइओसी) आगे आई है। बायो डीजल बनाने के लिए आइओसी का एक निजी कंपनी से अनुबंध होने जा रहा है। इसके लिए फरसपुर गांव में बायो डीजल संयंत्र और पास में ही तेल संग्रहण केंद्र बनाया जा रहा है। यहां इंदौर के 200 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 16 जिलों से नमकीन उद्योग, रेस्त्रां और होटलों का अनुपयोगी खाद्य तेल जुटाया जाएगा। इनमें इंदौर, उज्जैन, देवास, रतलाम, धार, भोपाल, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, खंडवा, खरगोन आदि शामिल हैं।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने आइओसी के साथ यह पहल की है। बताया जाता है कि गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु आदि में 14 स्थानों पर इस तरह के बायो डीजल संयंत्र हैं। प्रदेश में अपनी तरह का पहला संयंत्र होगा।

खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग के संयुक्त नियंत्रक अभिषेक दुबे ने बताया कि शासन की ओर से बायो डीजल नीति बनाई गई है। इसमें रियूज कुकिंग ऑइल (रुको) से बायो डीजल बनाने को प्राथमिकता दी गई है। एफएसएसएआइ इसमें समन्वयक की भूमिका में है। हमने कई नमकीन, चिप्स और खाद्य सामग्री निर्माताओं को चिन्हित किया है, जहां से तेल एकत्रित किया जाएगा। दिल्ली में आइओसी के रिन्यूएबल एनर्जी विभाग के उप महाप्रबंधक पीसी गुप्ता ने बताया कि इंदौर के लिए बायो डीजल बनाने वाली दो-तीन कंपनियों को एलओआइ (लेटर ऑफ इंडेंट) दिया है। एक कंपनी आगे आई है। हम उनसे 10 साल के लिए बायो डीजल खरीदेंगे।

एडनॉक कैम प्रालि के डायरेक्टर मनीष दिल्लीवाल ने बताया कि आइओसी से हमारा एलओआइ मंजूर हो चुका है। फरसपुर में संयंत्र का निर्माण जारी है। तेल एकत्रित करने वाली एमजी रिन्यूएबल एनर्जी एलएलपी के डायरेक्टर विजय ओसवाल बताते हैं कि प्रतिदिन करीब 30 टन बायो डीजल का निर्माण होगा। इसके लिए हमें रोज 40 टन जला खाद्य तेल चाहिए। उम्मीद है कि 16 जिलों से इसकी पूर्ति आराम से हो जाएगी। हम नमकीन और चिप्स निर्माताओं से लगातार संपर्क में हैं।

स्वास्थ्य की होगी सुरक्षा

खाद्य सुरक्षा के राज्य नोडल अधिकारी अरविंद पथरौल के अनुसार स्वास्थ्य संबंधी अध्ययन बताते हैं कि खाने के किसी भी तेल को तीन बार से अधिक गर्म करने पर यह स्वास्थ्य के लिए घातक हो जाता है। इसमें टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) 25 प्रतिशत से अधिक हो जाते हैं। बार-बार तलने पर यह कैंसर और दिल की बीमारियों का कारण बनता है। इसीलिए भारत सरकार की बायो डीजल नीति में रियूज कुकिंग ऑइल से बायो डीजल के निर्माण को शामिल किया गया है। इससे आम आदमी के स्वास्थ्य की सुरक्षा होगी। साथ ही जले तेल से ईंधन बनाया जा सकेगा।

फैक्ट फाइल

2466 करोड़ लीटर : खाद्य तेल की खपत होती है देश में हर साल

986.67 करोड़ लीटर : तेल का खाद्य इकाइयों में व्यावसायिक उपयोग होता है

1480 करोड़ लीटर : तेल का घर की रसोई में होता है उपयोग

1666.67 करोड़ लीटर : खाद्य तेल का होता है आयात

800 करोड़ लीटर : खाद्य तेल का देश में उत्पादन

222 करोड़ लीटर : जला हुआ खाद्य तेल उपलब्ध है देश में हर साल

11 लाख 34 हजार 470 लीटर : जला हुआ खाद्य तेल इंदौर में निकलता है हर साल

60 फीसद : जला हुआ तेल वापस भोजन में चला जाता है

15 फीसद : जला हुआ खाद्य तेल साबुन कारखानों में हो जाता है उपयोग

Posted By: dinesh.sharma

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