प्रदीप दीक्षित, इंदौर, Black Spots on Roads। संकरी पुलिया हादसे का कारण बन गई, अंधे मोड़ पर वाहन नहीं संभला और दुर्घटना घट गई, जर्जर सड़क ने फिर किसी की जान ले ली...। ऐसे मामले रोज सामने आ रहे हैं। किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जिम्मेदार जागते हैं और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी कर दी जाती है, इसके बाद भी लोगों की मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है। नईदुनिया ने इंदौर-उज्जैन संभाग के दस जिलों में पड़ताल की तो 143 ब्लैक स्पाट मिले, जहां हादसों का 'सफर' अब तक जारी है। पेश है रिपोर्ट...

143 ब्लैक स्पाट... अगर यहां से गुजर रहे हों तो जरूर ध्यान दें

देवास : देवास में एक साल में 45 हादसे हुए हैं। इंदौर-बैतूल नेशनल हाईवे 59 ए पर दुर्घटना संभावित कई क्षेत्र हैं। बावलिया से कलवार घाट तक का 60 किमी के मार्ग पर छह ब्लैक स्पाट हैं। चापड़ा के समीप गांव मोखापीपल्या में कालीसिंध नदी पर बूढ़ी पुलिया है। यहां चार-पांच महीनों में आधा दर्जन दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसका मुख्य कारण पुलिया का संकरा होना है।

उज्जैन : शहर से बड़नगर की दूरी करीब 60 किमी है। यह स्टेट हाइवे नंबर 18 ए है, जिसे मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा बनाया गया है। मार्ग पर एक साल में 38 दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें 18 लोग मारे गए हैं। इस रोड पर 6 ब्लैक स्पाट हैं। इनमें मुख्य रूप से चंदूखेड़ी, चिखली, गंभीर पुल, खरसौदखुर्द शामिल हैं।

खंडवा : इंदौर-इच्छापुर हाईवे का दायरा 90 किमी है। मोरटक्का से कटी घाटी तक चार ब्लैक स्पाट हैं। छैगांवमाखन क्षेत्र में दो, पंधाना में एक वधगांव थाना क्षेत्र में एक ब्लैक स्पाट है। पिछले वर्ष 10 दुर्घटनाओें में 10 लोगों की मौत हुई व 15 से अधिक घायल हुए हैं।

खरगोन : जिले में 29 ब्लैक स्पाट हैं। इनमें 11 बड़वाह क्षेत्र से गुजर रहे इंदौर-इच्छापुर स्टेट हाइवे पर हैं। जिले में 2020 में 897 सड़क दुर्घटनाएं हुईं।

रतलाम : 48 ब्लैक स्पाट हैं। महू-नीमच हाईवे 87 किमी, रतलाम-झाबुआ हाईवे 42 किमी, रतलाम-खाचरौद टू लेन 28 किमी, जावरा टू लेन 52 से वाहन गुजरते हैं।

शाजापुर : जिले से आगरा-मुंबई मार्ग गुजरता है। जिले में तीन ब्लैक स्पॉट हैं, टुकराना जोड़, गांव सनकोटा और नैनावद पुलिया हैं। यहां हादसों का डर बना रहता है। जिले में वर्ष 2020 में 432 हादसे हुए।

मंदसौर : जिले में महू-नीमच राजमार्ग की लंबाई 60 किमी है। इस पर करीब 12 ब्लैक स्पाट हैं। साल 2020 में इस मार्ग पर 559 हादसे हुए हैं।

झाबुआ : जिले से बैतूल- अहमदाबाद नेशनल मार्ग 47 गुजर रहा है। पिटोल से माछलिया तक 13 ब्लैक स्पाट हैं। माछलिया घाट में 1 साल में यहां 18 हादसे हुए हैं। इनमें 5 की मौत हुई है।

बड़वानी : जिले में कुल 17 ब्लैक स्पाट हैं। इनमें से 12 जिले से गुजर रहे करीब 80 किमी के मुंबई-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर हैं, जहां आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। जिले में बीते साल 842 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं।

धार : जिले में इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 110 किमी है। इस पर 5 ब्लैक स्पाट हैं। एक साल में 45 दुर्घटनाएं हुई हैं।

सड़क हादसे रोकने के लिए एमपीआरडीसी की सभी सड़कों पर साइनेज (संकेतक) लगवा रहा है। निरीक्षण कर दुर्घटना के कारण भी पता कर उसे दूर करेंगे। लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। - एसके मनवानी, संभागीय प्रबंधक, एमपीआरडीसी, उज्जैन

Posted By: Prashant Pandey

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