Road Safety Indore इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अक्सर देखा जाता है कि बस ड्रायवर न केवल वाहन बल्कि खुद की सेहत के प्रति भी अनदेखी करते हैं। इसका खामियाजा कई बार वे खुद अपनी जान गंवाकर तो उठाते ही हैं साथ ही दूसरों की मौत की वजह भी बनते हैं। एक ड्रायवर का वाहन की जांच और रखरखाव पर ध्यान देना जितना जरूरी है उतना ही आवश्यक उसका अपनी सेहत के प्रति सजग होना भी है। यदि किसी बस चालक की तबीयत खराब हो रही है तो वह वाहन बिल्कुल भी न चलाए क्योंकि आपकी लापरवाही कई लोगों की जान जोखिम में डाल सकती है।

यह बात अजीत सिंह चौहान सहायक पुलिस आयुक्त यातायात जोन-1 ने नईदुनिया द्वारा जारी सड़क सुरक्षा अभियान के अंर्तगत आयोजित विशेष सत्र में कही। यातायात के नियमों के प्रति बस और एंबुलेंस चालकों को जागृत करने के लिए श्री अरबिंदो संस्थान में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें बस और एंबुलेंस चालकों को समझाइश देते हुए अजीत सिंह चौहान ने कहा कि वाहन चालक को केवल आंखों की जांच ही नहीं बल्कि पूरे शरीर की जांच वर्ष में कम से कम एक बार तो जरूर करवानी चाहिए।

उम्र के साथ आंखें कमजोर होना, जीवनशैली से जुड़े रोग जैसे मधुमेह, हृदयरोग, उच्च या निम्न रक्तचाप का होना आम है। ऐसे में समय-समय पर जांच कराकर रोग और रोगों के कारण होने वाली सड़क दुर्घटना से बचा जा सकता है। वर्तमान में स्कूल बस चालक भी यातायात के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। सुबह 8 बजे ट्रैफिक सिग्नल शुरू हो जाते हैं लेकिन सड़क पर ट्रैफिक कम होता है। ऐसे में कई बस चालक ट्रैफिक सिग्नल पर ध्यान नहीं देते और सिग्नल की लाल लाइट होने पर भी बस रोकते नहीं।

यह गलत है क्योंकि आपके द्वारा किया गया यातायात के नियमों का उल्लंघन हो सकता है कि नियम का पालन करने वाली की जान ले ले। जिस मार्ग पर वाहन की गति संबंधित बोर्ड लगे हैं वहां उसी गति में वाहन चलाएं। जहां बोर्ड नहीं है वहां भी स्कूल बस 45 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से अधिक गति में नहीं चलानी चाहिए। एंबुलेंस चालक भी अंधाधुंध गति से एंबुलेंस नहीं चलाएं। जहां आवश्यक है वहीं तय गति से एंबुलेंस चलाएं।

एंबुलेंस हो या बस दोनों की समय-समय पर जांच और सर्विसिंग कराते रहना चाहिए। बस या एंबुलेस चलाने से पहले एक बार उसके ब्रेक, क्लच, एक्सीलरेटर, स्टीयरिंग, पहियों, हार्न, इंडिकेटर आदि की जांच जरूर कर लें। कभी भी किसी तरह का नशा करने वाहन न चलाएं और यदि वाहन चलाने से पहले या वाहन चलाने के दौरान जरा भी तबीयत खराब लग रही हो तो वाहन बिल्कुल न चलाएं।

ओवरटेक करते समय ध्यान रखें

जब आप ओवरटेक कर रहे हों तो कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ओवरटेक करने से पहले यह देख लें कि सामने से कोई वाहन तो नहीं आ रहा। आपके वाहन के आगे चलने वाला वाहन जब ओवरटेक करने की अनुमति का संकेत दे तभी ओवरटेक करें। तंग रास्ता, तंग पुलिया, अंधा मोड़ या सामने चल रहे वाहन के कारण उसके आगे का नजर नहीं आने पर ओवरटेक बिल्कुल न करें। इस अवसर पर श्री अरबिंदो संस्थान के जनरल मैनेजर राजीव सिंह और जनसंपर्क अधिकारी अनिल त्रिवेदी भी उपस्थित थे। राजीव सिंह ने भी बस और एंबुलेंस चालकों को स्वास्थ्य परीक्षण कराने की सलाह दी।

Posted By: Sameer Deshpande

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