इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इस बार के बजट में भी शहरवासियों को रेल सुविधाओं को लेकर काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वे पूरी नहीं हुईं। जिस हिसाब से बजट मिल रहा है, वह पर्याप्त नहीं है। जो राशि आवंटित की जाती है, वह कार्य के हिसाब से पर्याप्त नहीं होती। चाहे इंदौर-दाहोद परियोजना हो या मनमाड़-इंदौर, या फिर धार-छोटा उदयपुर। इनमें से तीन प्रोजेक्ट को शुरू हुए दस साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन पर्याप्त राशि के अभाव में एक ओर जहां काम में देरी हो रही है, वहीं दूसरी ओर इन परियोजनाओं की लागत भी बढ़ती जा रही है।

दो हजार करोड़ रुपए की इंदौर दाहोद परियोजना, मिले 100 करोड़

बजट में इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के लिए सौ करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। यह राशि पिछले साल बजट में इस परियोजना के लिए दी गई राशि से 50 करोड़ कम है। वहीं 2007-08 से लेकर अब तक परियोजना के लिए 606 करोड़ रुपए ही मिले हैं, जिसमें से 420 करोड़ खर्च हो चुके हैं। इस पूरी योजना की लागत लगभग दो हजार करोड़ से अधिक है, देरी के कारण इसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

परियोजना में अब तक जमीन अधिग्रहण को लेकर ही काम चल रहा है। इंदौर से लेकर टीही तक रेल परियोजना के तहत पटरी बिछाने का काम हो चुका है। औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर में रेल सुविधा मिलने भी लगी है, जबकि पीथमपुर क्षेत्र में ही अभी टनल निर्माण का कार्य जारी है। इसमें लंबा समय लगेगा। पीथमपुर से लेकर सरदारपुर तक जमीन अधिग्रहण को लेकर प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है।

इंदौर-दाहोद रेल परियोजना

-209 किमी है लंबाई।

-सिग्नल प्रणाली श्रेणी तीन की योजना 2008 में शुरू हुई थी।

-घोषणा अनुसार 2011 में पूरा होना था कार्य।

-रेल विभाग के अनुसार छह साल में योजना पूरी करने का था लक्ष्य।

-2008 में अनुमानित लागत थी 678 करोड़।

-अब लागत हुई दो हजार करोड़ से ज्यादा।

इंदौर-मनमाड़ परियोजना : रेल लाइन को लेकर हिस्सेदार तो तय, काम वहीं का वहीं

इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के लिए 26 जून 2018 को नई दिल्ली में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, जहाजरानी और रेल मंत्रालय के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। लगभग 10 हजार करोड़ रुपए की इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना 362 किलोमीटर लंबी है। अब इसका काम अटक गया है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने इस लाइन का विधानसभा चुनाव के पहले उद्घाटन भी किया था, लेकिन अब यह योजना धीमी गति से चल रही है।

इस योजना का काम पोर्ट-रेल कनेक्टिविटी कॉर्पोरेशन करवा रहा है। मनमाड़-इंदौर रेलवे संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे ने बताया कि स्पेशल विकास के तहत इस योजना में राज्य सरकारों के साथ-साथ जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह की ओर से 55 फीसदी राशि, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की ओर से 15-15 फीसदी, जहाजरानी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से 15 फीसदी की हिस्सेदारी देना तय हुआ है। उसके बाद इस परियोजना को लेकर कोई विशेष गति नहीं आई।

राशि की मंजूरी के बाद भी काम शुरू नहीं

मराठे ने बताया कि यह रेल लाइन महाराष्ट्र में 186 किलोमीटर और मध्यप्रदेश में 176 किलोमीटर होगी। इस मार्ग पर 120 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ेंगी। इसमें 13 बड़े स्टेशन और 27 स्टेशन छोटे होंगे। इसके निर्माण में 2008 हेक्टेयर जमीन लगेगी, जिसमें 964 हेक्टेयर महाराष्ट्र और बाकी मध्यप्रदेश की होगी। इसकी लागत वर्तमान में 5000 से बढ़कर लगभग 10,000 करोड़ हो गई है। इस परियोजना को लेकर रेलवे बोर्ड, जहाजरानी मंत्रालय और इस परियोजना को पूरा करने के लिए नवनिर्मित रेलवे पोर्ट कॉर्पोरेशन द्वारा एमओयू हस्ताक्षर किए जाने के बाद भी कोई उचित पहल नहीं की गई, जिससे लागत लगातार बढ़ रही है ।

घट जाएगी इंदौर से मुंबई की दूरी, व्यापार भी बढ़ेगा

वर्तमान में इंदौर-मुंबई की दूरी देवास, उज्जौन, रतलाम, वडोदरा और सूरत होते हुए 830 किलोमीटर है। इंदौर-मनमाड़ लाइन से यह दूरी घटकर 644 किलोमीटर रह जाएगी। इंदौर-मनमाड़ लाइन 354 किमी लंबी होगी, जबकि मनमाड़ से मुंबई की दूरी 290 किमी है। इस तरह सीधे-सीधे 186 किमी का सफर यात्रियों को कम करना पड़ेगा। साथ ही चार-पांच घंटे की बचत होगी और किराया भी कम होगा। व्यावसायिक दृष्टि से भी यह रेल मार्ग फायदेमंद होगा।

धार-छोटा उदयपुर : 1400 करोड़ की योजना, काम कुछ भी नहीं

धार-छोटा उदयपुर परियोजना के लिए भी सौ करोड़ रुपए ही मंजूर हुए हैं। परियोजना की लंबाई 157 किमी है। जब इसकी स्वीकृति हुई थी, तब इसकी लागत 1400 करोड़ रुपए थी। इस पर अब तक 40 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। पिछले वर्ष इसके लिए जो बजट स्वीकृत हुआ था, उसमें 100 करोड़ रुपए मिले थे, लेकिन माना जा रहा है कि जब इसकी स्थिति फिर से स्पष्ट हुई तो उसमें पैसा नहीं मिल पाया। इस साल भी केवल सौ करोड़ रुपए ही मिल पाए हैं। ऐसी स्थिति में रेल बजट रेलवे के विकास के लिए बहुत सार्थक नहीं रहा है। दूसरी ओर जमीन अधिग्रहण में ही यही राशि खर्च होती रही तो बड़े स्तर पर काम कैसे होगा। जिले में रंगपुरा से धार जिले की सीमा तक अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है।

इंदौर-उज्जैन डबल लाइन का काम भी अधूरा

रेलवे सलाहकार नागेश नाम जोशी ने बताया कि इंदौर-देवास और उज्जैन के बीच डबल लाइन डालने का काम अब तक पूरा हो जाना था। इस बार इस योजना के लिए 20 करोड़ रुपए मिले हैं। 79.23 किमी की योजना में दो साल से अधिक का समय लगा दिया और अब भी काम अटका हुआ है। इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारी भी इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। इस लाइन को इंदौर से देवास की तरफ बनाया था, लेकिन रेलवे ने उज्जैन की तरफ से काम शुरू किया। सबसे ज्यादा कंजक्शन इसी रूट पर है, इसलिए ट्रेनें भी इसी लाइन पर सबसे देरी से स्टेशन पहुंचती हैं। इसके अलावा अन्य ट्रैक के काम में भी देरी हो रही है। स्थिति यह है कि बजट तो है, लेकिन अधिकारी काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।

महू-खंडवा : 2370 करोड़ से अधिक की योजना, मिले 773 करोड़

सरकार ने शुक्रवार को आम बजट के साथ ही रेल बजट पेश किया है, जिसमें रतलाम-इंदौर-महू-खंडवा-अकोला के बीच गेज परिवर्तन को एकमुश्त बजट मिला है। महू से खंडवा तक की लागत लगभग 2370 करोड़ रुपए है। अब तक 773 करोड़ रुपए सरकार की तरफ से मिल चुके हैं। वहीं, खंडवा से सनावद के लिए बायपास लाइन डालने के लिए 487 करोड़ रुपए अलग से मिले थे, तीन साल में अब यह काम पूरा नहीं हो सका है। बजट मिलने के बाद गेज परिवर्तन के निर्माण कार्य में रफ्तार आएगी। दूसरी ओर यात्री सुविधाओं को लेकर खंडवा के हाथ निराशा लगी है।

ट्रेन चलाने की कोई घोषणा नहीं

इस बार कोई भी नई ट्रेन चलाने की घोषणा नहीं की गई है और न ही किसी नई ट्रेन के जंक्शन पर स्टॉपेज की बात हुई है। रेल जानकारों की मानें तो रतलाम-अकोला गेज परिवर्तन प्रोजेक्ट को अनुमानित 355 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ है। पूर्व में रेलवे को गेज परिवर्तन के लिए 487 करोड़ रुपए का बजट उपलब्ध कराया जा चुका है। इस बजट में और राशि मिलने से महू से खंडवा और अकोला के बीच गेज परिवर्तन के निर्माण कार्य में गति आएगी।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

 
Show More Tags