इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इंदौर के शनि मंदिरों में चार दिसंबर को शनैश्चरी अमावस्या का उल्लास छाएगा। इस मौके पर ढैया और साढ़े साती में राहत के लिए भक्त शनिदेव का तिल-तेल से अभिषेक करेंगे। फूल बंगला, छप्पन भोग, महाआरती जैसे आयोजन भी होंगे।

इस बार शनैश्चरी अमावस्या और वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण एक ही दिन होगा। हालांकि ग्रहण देश में नहीं दिखने से इसका धार्मिक महत्व भी नहीं होगा। ज्योतिर्विद् रमाकांत बड़वे के अनुसार मार्गशीर्ष मास की अमावस्या तिथि 3 दिसंबर शाम 4.55 बजे से शुरू होकर 4 दिसंबर दोपहर 1.12 बजे तक रहेगी।

फूल बंगला सजाकर लगाएंगे छप्पन भोग

जूनी इंदौर के शनि मंदिर में फूल बंगला सजाकर छप्पन भोग लगाया जाएगा। इस अवसर पर शनिदेव के मूल स्वरूप के दर्शन होंगे और भक्तों के बीच नवग्रह यंत्र का वितरण किया जाएगा। पुजारी सचिन तिवारी ने बताया कि शनैश्चरी अमावस्या पर की गई शनिदेव की आराधना अवश्य फलित होती है। इस अवसर पर पवित्र नदी में स्नान और दान का विशेष महत्व है।

सौम्य और प्रसन्न मुद्रा में होंगे दर्शन

जवाहर मार्ग स्थित 300 वर्ष पुराने शनिदेव मंदिर पर शनिदेव सौम्य और प्रसन्ना मुद्रा में नजर आएंगे। ज्योतिषाचार्य बाबूलाल जोशी के अनुसार भगवान की प्रसन्न मुद्रा का मुखौटा बनाया गया है। इसे शनैश्चरी अमावस्या पर धारण कराया जाएगा। शनिदेव के बारे में भयानक व क्रूर दिखने वाला प्रचार उचित नहीं है। मंदिर प्रबंधन ने भगवान के सुंदर चेहरे की कल्पना करते हुए मुखौटा तैयार किया गया है।

गजासीन शनि मंदिर में होगा विशेष श्रृंगार

गजासीन शनिधाम उषानगर में भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। दादू महाराज के सान्न्ध्यि में सुबह जल से स्नान के बाद तेलों से अभिषेक किया जाएगा। सेवाधारी माधव इंदौरी ने बताया कि रात 8 बजे 108 दीपकों से आरती की जाएगी।

बंगाली समाज ने अमावस्या पर की काली पूजा

बंगाली समाज द्वारा बंगाली क्लब में मार्गशीर्ष अमावस्या पर शुक्रवार को काली पूजा की गई। इस मौके पर विधि-विधान से हवन कर कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन से मानवजाति की रक्षा की कामना की गई। क्लब के सांस्कृतिक सचिव अंबुज दत्ता ने बताया कि वर्ष की अंतिम अमावस्या के अवसर पर विशेष पूजा का आयोजन रखा गया। इसके माध्यम से विगत वर्ष मानवजाति की विपत्तियों से रक्षा करने के लिए काली माता के प्रति आभार माना गया।

Posted By: gajendra.nagar

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