इंदौर। 15 लोगों की आंखों की रोशनी छीनने वाले इंदौर आई अस्पताल के दो डॉक्टरों के खिलाफ 13 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने इंदौर आई हॉस्पिटल के डायरेक्टर डाॅ सुधीर महाशब्दे और सुपरिटेंडेंट डाॅ सुहास बांडे के खिलाफ आईपीसी की धारा 336, 337, 338, 34 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

कलेक्टर द्वारा बनाई गई जांच समिति की रिपोर्ट आने व संभागायुक्त के निर्देश के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। एफआईआर में पांच अगस्त को हुए ऑपरेशन बिगड़ने की जानकारी होने के बावजूद आठ अगस्त को कैंप लगाकर 14 मरीजों का ऑपरेशन करने की लापरवाही बरतने को आधार बनाया गया है।

सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया ने एफआईआर में इस पूरी घटना का जिक्र कराया है। उसके अनुसार इंदौर आई अस्पताल में पांच अगस्त को मोतियाबिंद ऑपरेशन किए गए। छह अगस्त को इनमें से चार मरीजों ने आंख में सूजन की शिकायत की। इनमें से दो मरीजों की आंखों की रोशनी नहीं बच सकी।

इसके बावजूद आठ अगस्त को कैंप लगाकर 14 व्यक्तियों का ऑपरेशन कर दिया। जबकि इसके पहले ही संक्रमण होने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन की जानकारी में आ चुकी थी। संस्थान को नेत्र चिकित्सा बंद करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऑपरेशन थिएटर को संक्रमण मुक्त किए बगैर आठ अगस्त को ऑपरेशन किया जाना प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही है।

संक्रमण की जानकारी थी

डॉ. महाशब्दे व डॉ. बांडे के कथन अनुसार पांच अगस्त को सशुल्क किए गए ऑपरेशन में मरीजों की आंख में सूजन पाई गई। उनका इलाज छह अगस्त को शुरू किया गया। 13 अगस्त को मुन्नी बाई व 14 अगस्त को राधाबाई की आंख निकाल दी गई थी। छह अगस्त को संक्रमण की जानकारी हो चुकी थी। इसके अलावा मोहन देवका व बालमुकुंद की आंख भी निकालनी पड़ी। कुल चार लोगों की आंख निकाली गई। इससे स्पष्ट है कि संक्रमण की जानकारी इंदौर आई अस्पताल प्रबंधन को हो चुकी थी। उन्होंने अलग-अलग विशेषज्ञों को भी दिखाया।

सात अगस्त को आंख के ऑपरेशन बंद कर दिए जाने थे। डॉ. महाशब्दे ने स्वास्थ्य विभाग को बताया था कि नौ अगस्त को ऑपरेशन थिएटर में काम बंद कर दिया गया तो फिर 11, 12 व 13 अगस्त को भी ऑपरेशन क्यों किए गए। डॉ. बांडे मेडिकल सुपरिटेंडेंट होने के नाते इस संपूर्ण व्यवस्था के जिम्मेदार हैं।

अस्पताल भी उन्हीं के नाम रजिस्टर्ड है। पांच अगस्त को मोतियाबिंद के ऑपरेशन डॉ. बांंडे ने ही किए। उनमें से तीन लोगों की आंखों की रोशनी चली गई। छह और सात अगस्त को मरीजों को देखने पर इंफेक्शन होने की जानकारी होने के बाद भी आठ अगस्त को शिविर लगाने को गंभीर आपराधिक लापरवाही माना गया।

एफआईआर के अनुसार अंधत्व निवारण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. टीएस होरा ने 13 अगस्त को इंदौर आई अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर सील कर दिया था। इसके बाद भी 13 व 14 अगस्त को ऑपरेशन किए गए। यह कृत्य शासकीय अधिकारी द्वारा सील ओटी में नहीं किया जा सकता। ऐसा कर प्रबंधन ने आदेश का उल्लंघन किया है। डॉ. जड़िया ने एफआईआर में 2010-11 में भी ऑपरेशन के दौरान 18 मरीजों की आंख्ाों की रोशनी जाने का उल्लेख किया है।

Posted By: Hemant Upadhyay

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