इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Catholic Diocese of Indore। हमारा शरीर ईश्वर ने शरीर रूपी मंदिर दिया है । इसके बावजूद क्या हम इस मंदिर की पवित्रता को बनाए रखते हैं । ईश्वर हमारे जीवन के हर क्षण में हमारे साथ ही रहते हैं लेकिन क्या हम हर क्षण ईश्वर के साथ रहते हैं। हम जब जब झूठ बोलते हैं, चोरी करते हैं, अपशब्द कहते हैं, व्यभिचार करते हैं, रिश्वत लेते हैं, दूसरों को नीचे दिखाते हैं, घमंड करते हैं, और जाने क्या क्या बुरे कार्य करते हैं तब तब हम ईश्वर के मंदिर को अपवित्र करते हैं।

यह बात मुख्य प्रवचनकर्ता फादर बाबी वीसी ने शुक्रवार को कही। वे कैथोलिक धर्मप्रांत इंदौर के 10वें तीन दिनी आनलाइन बाइबिल महोत्सव के पहले दिन संबोधित कर रहे थे। ।उन्होंने कहा कि इन कृत्यों को कर हम स्वयं ईश्वर से दूर चले जाते हैं। इसके बाद सोचते हैं कि हमने तो ईश्वर को हरा दिया है।वास्तविकता तो यह है कि हम खुद अपने पापों के द्वारा ईश्वर से हार चुके हैं। प्यारे भाइयों एवं बहनों आज हम सबको बदलाव की रूरत है।हमें शरीर रुपी मंदिर को पवित्र रखना है। हम ईश्वर से दूर चले गए हैं और हमें ईश्वर के पास वापस लौटकर आना है। ।23 एवं 24 अक्टूबर को भी यह महोत्सव सुबह 10 बजे से 01:30 बजे तक तथा शाम 04 बजे से शाम 08 बजे तक चलेगा।

गुबारों में की रंगीन रोजरी माला आकाश में उड़ाई

इससे पहले उद्घाटन गुबारों की रंगीन रोजरी माला को आकाश में उड़ाकर किया गया। इंदौर के बिशप डा. चाको टी अपने हाथों में पवित्र बाइबिल लेकर तथा भोपाल के महाधर्माध्यक्ष एएएस दुरईराज अपने हाथों में माता मरिया की मूर्ति उठाकर जुलुस के रूप में प्रार्थना स्थल तक आए। जुलुस के आगे-आगे नृत्य करते हुए महिलाएं जुलुस की अगुवाई कर रही थी। प्रार्थना स्थल पर पवित्र बाइबिल एवं माता मरियम की मूर्ति को स्थापित करने के पश्चात् दीप प्रज्ज्वलित किया गया। इसके बाद इंदौर धर्मप्रांत के विकार जनरल फादर सी माइकल जॉन ने सभी का स्वागत किया।

ईश्वर ने कहा फलो फूलों और पृथ्वी पर फैल जाओ

धमानव को ईश्वर ने बनाया और ईश्वर मानव को बहुत अधिक प्रेम करते है। ईश्वर ने कहा फलो फूलो और पृथ्वी पर फैल जाओ। पृथ्वी का पूरा वातावरण, पर्यावरण, सब प्रकार की हरियाली, सभी फल-फूल तुम्हारे लिए हैं। भौतिक फलों के साथ-साथ ईश्वर ने हम सबको बहुत से आध्यात्मिक फल (वरदान) दिए हैं। प्रेम, क्षमा, दया, ममता, वात्सल्य ये सब वरदान ईश्वर ने हमें दिए हैं। ईश्वर प्रतिदिन प्रत्येक मनुष्य को भिन्ना- भिन्ना तरीके से बहुत से वरदान देते ही रहते हैं। मनुष्य को केवल इतना करना है कि वह ईश्वर की आज्ञाओं का सच्चे मन से पालन करें। जब ईश्वर मनुष्य बनकर धरती पर आए तब स्वयं ईश्वर ने अनेकों कष्ट झेले और अंत में प्राण दंड की आज्ञा भी ग्रहण की। इसलिए मनुष्य पर जब जब छोटे- बड़े दु:ख, मुसीबतें, विपदाएं, बीमारियाँ आती हैं तब हमें इन सब को ईश्वर का नाम लेते हुए सहन करना है। ईश्वर दयालु है और कहते हैं मैंने धरती पर दु:ख सहा, तुम भी इस दु:ख में मेरे सहभागी बनो। किन्तु याद रखो मैं तुम्हें सब कष्टों से मुक्ति दिलाऊंगी

Posted By: gajendra.nagar

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