लोकेश सोलंकी, इंदौर Indore News। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग (सीजीएसटी) के अधिकारियों पर कमीशन मांगने का आरोप लगा है। शहर के एक निर्यातक कारोबारी ने न केवल आरोप लगाया है बल्कि शिकायत भी विभाग को कर दी है। कारोबारी आरोप लगा रहा है कि विदेश निर्यात किए गए कृषि उत्पादों के बदले सरकार की तरफ से उसे चुकाया गया टैक्स (टैक्स क्रेडिट) वापस मिला है। इस पैसे के बदले उससे विभाग के अधिकारी कमीशन की मांग कर रहे हैं। विभाग ने जांच के दौरान अधिकारियों से हुई कहा-सुनी को इस शिकायत की वजह करार दिया है।

उद्योग नगर पालदा में कविता एग्रो मार्केटिंग नामक कंपनी के संचालक अरुण डोसी से इस बारे में सीजीएसटी के स्थानीय कार्यालय को शिकायत की है। इंदौर के साथ युनाइटेड स्टेट्स और कंबोडिया में भी दफ्तर संचालित करने वाले डोसी ने आरोप लगाया है कि बीते सप्ताह सीजीएसटी के दो अधिकारी विनय भटनागर और नितिन गुप्ता उनके इंदौर स्थित दफ्तर पर निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। निर्यात से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। कंपनी के निर्यात के दस्तावेज सही निकले। कुछ और कागज अधिकारियों ने मांगे।

इसके बाद कंपनी का चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) इंदौर के सीजीओ काम्प्लेक्स स्थित दफ्तर में दस्तावेज देने पहुंचा। अधिकारी ने सीए को सरकार की ओर से वापस मिले इनपुट टैक्स क्रेडिट रिफंड के रुपयो के अनुपात में दो प्रतिशत कमीशन देने के लिए कहा। डोसी ने आरोप लगाया कि जब उनके बिल से लेकर पूरा कारोबार में न तो टैक्स चोरी की मंशा है न ही कोई दस्तावेजी गड़बड़ी तो वो किसी को कमीशन क्यों दे। डोसी ने मामले में अधिकारियो पर कार्रवाई की मांग रख दी है।

निरीक्षण में हुई थी बहस

विभाग ने कमीशन मांगने के आरोपों को खारिज कर दिया है। इंदौर स्थित सीजीएसटी के अधिकारियों ने कहा कि निर्यातक को अपने टैक्स की क्रेडिट (आइटीसी) तो पहले ही वापस मिल चुकी है। केंद्र की ओर से सीधे निर्यात करने वाले के बैंक खातों में क्रेडिट रिफंड किया जाता है। दरअसल डायरेक्टोरेट जनरल आफ एनालिटिक्स एंड रिस्क मैनेजमेंट (डीजीएआरएम) की ओर से रिस्की माने जाने वाले निर्यातकों के भौतिक सत्यापन के लिए विभाग को निर्देश मिलते हैं। इसी निर्देश के तहत अधिकारी पालदा स्थित कंपनी के दफ्तर पर जांच के लिए पहुंचे थे। जांच अधिकारी और सीजीएसटी के अधीक्षक विनय भटनागर के मुताबिक निर्यातक के दफ्तर पर हम पहुंचे तो उन्होंने फोन कर हमारे बिना बताए निरीक्षण पर आने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने दफ्तर के नीचे बनी मिल किराए पर दे रखी है। दफ्तर की पते को लेकर सवाल जवाब से वे भड़क गए थे। बिल व अनुमतियों में भी कोई खास गड़बड़ नहीं मिली। उन्हें रिफंड भी पहले ही मिल चुका है। कमीशन मांगने की बात ही गलत है। हमारे सवालों और निरीक्षण से संभवत: उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंची हो वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे बात की वे अब संतुष्ट है।

ये है प्रक्रिया

कमर्शियल टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कर सलाहकार एके गौर के अनुसार कोई भी निर्यातक अपने उत्पाद विदेश भेजता है तो उसे बिल व चुकाए टैक्स, शिपमेंट व अन्य जानकारी पोर्टल पर अपलोड करना होती है। रिटर्न दाखिल करने के 15 दिनों बाद चुकाए गए टैक्स की राशि रिफंड के रूप में सीधे उसके खाते में आ जाती है। बीते समय देश में कई जगह निर्यात के नाम पर फर्जी टैक्स क्रेडिट के घोटाले सामने आ चुके हैं। इसके बाद डीजीएआरएम समय-समय पर निर्यातक के सत्यापन की प्रक्रिया करवाता रहता है।

Posted By: Sameer Deshpande

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