Chaitra Navratri 2021: कोरोना की पहली लहर में जब महामारी के नाम से लोग खौफ खा जाते थे, तब कई ऐसी महिलाएं थीं, जो खुद की परवाह किए बिना दिन-रात लोगों की सेवा में लगी रहीं। इन महिलाओं ने महामारी के दौरान घर-परिवार सबको भूलकर मानवता की सेवा में खुद को अर्पित कर दिया है। नवरात्र में पढ़िए ऐसी ही देवी स्वरूपा महिलाओं की कहानियां...

पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हालात, अपना ध्यान रखें

खंडवा में पिछले साल मार्च-अप्रैल में जितने मरीज पहुंचे उससे अधिक इस समय आ रहे हैं। ऐसे में इनकी देखरेख करना, मनोबल बढ़ाना चुनौती हो गया है। ग्रामीण इलाके से आए कई मरीज बार-बार यही सवाल करते हैं कि मैडम हमें कुछ होगा तो नहीं। दवा से हम ठीक हो जाएंगे। इस दौरान उन्हें सहानुभूतिपूर्ण रूप से समझाना होता है। पिछले साल कोविड संक्रमण की शुरुआत हुई थी। अब इसका दूसरा दौरा शुरू हो चुका है, इसलिए अपना ध्यान रखें व कोरोना गाइडलाइन का पालन पूरी तरह से करें। यह कहना है कोविड केयर अस्पताल में ड्यूटी दे रही नर्सिंग प्रभारी एसएन खातिजा का। पिछले साल सबसे पहले इनकी ही ड्यूटी कोरोना वार्ड में लगाई गई थी। इनके साथ ही दो अन्य स्टाफ नर्स ने भी पूरी मेहनत से मरीजों की देखरेख की। अब फिर से इन्हें कोविड केयर सेंटर में नर्सिंग प्रभारी बनाया गया है। हर रोज 20 से अधिक संदिग्ध मरीज भर्ती हो रहे हैं व 20 के लगभग पाजिटिव आ रहे हैं। इनमें से चार या पांच मरीजों को अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। अब तक 270 मरीज कोविड केयर सेंटर में भर्ती हैं। इनमें से 77 मरीज पाजिटिव भर्ती हैं।

भाग्यशाली हूं, ड्यूटी के साथ मानव सेवा भी कर रही

इंदौर के रावजी बाजार थाने की प्रभारी सविता चौधरी कहती हैं, कोविड महामारी के कठिन समय में लोगों की सुरक्षा में पुलिस 24 घंटे तैनात है। सुरक्षा के साथ उन्हें महामारी से बचाने के लिए जागरूक भी करना है। 7 बजे से ड्यूटी शुरू होते ही लोगों को समझाइश देना शुरू कर देते हैं। लाकडाउन में ढील होती है, इसलिए किसी तरह की पाबंदियां नहीं हैं। सख्ती भी नहीं कर सकते। घर में बच्चों और पति का पूरा सहयोग है। पति भी सुबह से ड्यूटी पर निकल जाते हैं। बच्चे भी समझते हैं कि इस मुश्किल घड़ी में लोगों को पुलिस की जरूरत है। दोपहर में यदि कुछ देर आराम मिला तो ठीक, वरना पूरे समय ड्यूटी चलती रहती है। पिछली बार लाकडाउन के बाद मैं कोरोना पाजिटिव हो चुकी हैं, इसलिए मुझे पता है कि कोरोना संक्रमण कितना खतरनाक है। संक्रमित होने के पहले और ठीक होने के बाद फिर से सड़क पर तैनात होकर काम में जुट गई। दिल्ली में महिला कोरोना वारियर्स अवार्ड भी मिला। इस बार कोरोना का संक्रमण ज्यादा खतरनाक है और लोगों को तेजी से संक्रमित कर रहा है। मुझे सुरक्षा के साथ अधिकारियों का मार्गदर्शन मिल रहा है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मुझे इस फील्ड में रहकर लोगों की सेवा करने का मौका मिला।

ईश्वर का आशीर्वाद है कि हमें सेवा के लिए चुना

इंदौर में एमटीएच अस्पताल प्रभारी डा अनुपमा दवे कहती हैं, अस्पताल में इन दिनों क्षमता से अधिक मरीज भर्ती हैं। इनमें से ज्यादातर गंभीर हैं। संक्रमितों के बीच खुद को संक्रमण से बचाकर मरीजों का इलाज करना आसान नहीं। महामारी के इस दौर में अस्पताल इंचार्ज के रूप में काम करना बहुत मुश्किल है। अस्पताल में तैनात स्टाफ में से ज्यादातर या तो खुद संक्रमित हो चुके हैं या स्वजन संक्रमित हो चुका है। स्टाफ को प्रोत्साहित करते हुए एक टीम लीडर के रूप में काम करना होता है। कई बार घर वालों के चेहरे भी याद आ जाते हैं, लेकिन मरीजों की परेशानियों के आगे वह कुछ नहीं। जब मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होते समय शुभकामना देते हुए घर जाते हैं तो लगता है कि पूरी मेहनत वसूल हो गई। घर में 83 वर्षीय मां हैं। पति को मधुमेह है। दोनों हाई रिस्क पर हैं। इसके बावजूद दोनों ने कभी कोई जिम्मेदारी लेने से मुझे नहीं रोका। अस्पताल का स्टाफ दिनभर पीपीई किट पहनकर काम करता है। कई बार साथी अवसाद में भी आ जाते हैं, लेकिन हम उन्हें समझाते हैं कि यह समय कुछ कर दिखाने का है। इसे ईश्वर का वरदान समझो कि उसने हमें किसी की सेवा के लायक समझा है।

Posted By: Prashant Pandey

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