Chaitra Navratri 2021। कोरोना संक्रमण ने एक साल से पूरी दुनिया को हिला रखा है। जिले में इस संक्रमण से लड़ने के लिए महिलाओं ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। कोविड वार्ड में कार्य कर रही स्टाफ नर्सों ने संक्रमित मरीजों को स्वजन मानकर उनकी सेवा की। कई दिनों तक वे अपने घर ही नहीं गईं। उज्जैन के मेडिकल कालेज में कार्यरत दया बामनिया को पिछले साल पता चला कि झाबुआ में कोविड स्टाफ नर्स की भर्ती हो रही है। चंद्रशेखर आजाद की जन्मभूमि चंद्रशेखर आजाद नगर की रहने वाली दया तत्काल झाबुआ आ गईं। यहां उन्होंने सेवा की मिसाल प्रस्तुत की। स्वजन चिंतित रहते थे : दया बाड़कुआं के कोविड वार्ड में चार माह तक लगातार रहीं। वे घर नहीं जाती थीं। माता-पिता और अन्य स्वजनों का फोन आता और सभी चिंतित होते थे। दया तीन-तीन घंटे तक पीपीई किट पहन ड्यूटी करती रहीं। वे कहती हैं- खतरा तोद बहुत था, लेकिन कभी नकारात्मकता को हावी नहीं होने दिया। जब कोरोना की रफ्तार थमी हो उन्हें काम से हटा दिया गया। अब कोरोना की दूसरी लहर आई है तो फिर से बुलवा लिया गया है। इन दिनों दया जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में उसी जज्बे के साथ मरीजों की सेवा कर रही हैं। हर रोज मरीज बढ़ते जा रहे हैं लेकिन दया कर्तव्य निभाने में जरा भी पीछे नहीं ह

हमारा परिवार बन गया था स्टाफ नर्स माया मेड़ा भी कोविड पाजिटिव की सेवा में निरंतर लगी रहीं। स्वजन से लगातार दूरी बनाकर रखी। घर जाने पर स्वजन के संक्रमित होने का खतरा था। वे यह खतरा नहीं लेना नहीं चाहती थीं, इसलिए कोविड सेंटर पर ही रहीं। उनका कहना है कि वार्ड में आने वाले मरीज ही उनका परिवार बन गया था। हर संक्रमित की वे उसी तरह से सेवा करती थीं, जैसे वह उनका स्वजन है। वे कहती हैं कि महामारी के दौर में यदि पीड़ितों को मदद की जाए तो इससे बड़ा और अच्छा कोई कार्य नहीं हो सकता

कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन हो, जिससे संक्रमण की चेन टूट सके

इस बार संक्रमण बहुत अधिक है। सुबह लाकडाउन खुलने के बाद लोगों की भीड़ बाजार में टूट पड़ती है। यह चुनौती का समय है, लोगों को पता है कि संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। पिछली बार की अपेक्षा यह इस बार अधिक घातक है। ऐसे में पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि लोगों के साथ संवेदना रखें और संक्रमण की चेन भी टूटे। मार्च 2020 में पूरी तरह लाकडाउन लगाया गया था, जिससे कि लोग घर से बाहर न निकलें और घर पर ही रहें। इसलिए लोगों को और संक्रमण को काबू करना इतना मुश्किल नहीं था। लेकिन इस बार शासन-प्रशासन ने आर्थिक स्थिति और लोगों की जरूरत का ध्यान रखते हुए तीन घंटे की छूट दी है। इसमें लोगों की सुविधा के साथ ही यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि दुकानों पर भीड़ न हो और लोगों को असुविधा भी न झेलनी पड़े। सुबह 10 बजे फिर से लाकडाउन लगने के बाद सड़कों पर चेकिंग शुरू हो जाती है। इसमें यह ध्यान दिया जाता है कि कोई भी फालतू व्यक्ति घूमता हुआ न दिखे। संक्रमण परिवार तक न पहुंचे इसलिए सभी को देवास भेज दिया है। घर पर अकेले ही खुद की जिम्मेदारी संभालने के साथ अपना फर्ज निभा रही हूं।

Posted By: Prashant Pandey

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