इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Indore News। सिंधी समाज हर वर्ष 10 अप्रैल को सिंधियत भाषा दिवस के रूप में मनाता है। पुनः कोरोना महामारी की बढ़ते हुए क्रम को देखते हुए इस वर्ष भी लॉकडाउन के चलते सिंधी समाजजनों ने घर पर रहते हुए ही इस दिवस को मनाया और बच्चों को सिंधी बोली और भाषा का ज्ञान कराया गया।

भारतीय सिंधु सभा के महामंत्री नरेश फुंदवानी ने बताया कि 10 अप्रैल 1967 को भारतीय संविधान की आठवींं अनुसूची में भारत की प्राचीन सिंधी भाषा को शामिल किया गया था तभी से 10 अप्रैल को सिंधियत दिवस के रूप में मनाया जाता है। सिंधी बोली को बढ़ावा देने में सिंधी वर्णमाला में सर्वाधिक 52 अक्षर होते हैं। सिंधी भाषा लिखाई में ऊर्दू जैसी दिखती है, किन्तु बोली में काफी अंतर होता है। सिंधु संस्कृति को संसार में सर्वाेच्च स्थान प्राप्त है क्योंकि सिन्धु संस्कृति भारत की प्राचीन मोहन जोदड़ो सभ्यता से जुड़ी है। सिंधी समुदाय का चेटीचंड भी सिंधु संस्कृति का अमर पर्व है, जो एक नई उमंग, नया उत्साह, नई चेतना लाता है।

भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची मैं सिंधी भाषा को 10 अप्रैल 1967 को जोड़ा गया था तथा प्रतिवर्ष इस दिवस को सिंधी भाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है इस अवसर पर प्रतिवर्ष विभिन्न संगो‍‍ष्ठ‍ियों साहित्यकारों के सम्मान समारोह वह विभिन्न प्रतियोगिताओं के आयोजन कर नई पीढ़ी में मातृभाषा के प्रति स्वाभिमान जगाने का कार्य किया जाता है। विभाजन का दंश झेलने वाला सिंधी समाज आज भी अपनी भाषा संस्कृति व इतिहास का संरक्षण करते हुए अखंड भारत का संकल्प अपने मन में संजोये हुए हैं। इस बार पुनः कोरोना महामारी बढ़ने एवं लॉकडाउन के कारण कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा गए परंतु आज के दिन समाज के लोगों ने अपने घर में बच्चों को सिंधी भाषा सिखाई और अपने गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी एवं अपनी श्रेष्ठ संस्कृति के बारे में बताया।

उन्होंने बताया कि आज के दिन समाजजनों ने संकल्प लिया कि समाज के सभी लोग घर पर आपस में सिंधी भाषा में बातचीत करेंगे एवं घर पर और परिवार में होने वाले विभिन्न सामाजिक एवं पारिवारिक आयोजनों में आपस में सिंधी भाषा का अधिकाधिक प्रयोग करेंगे। भाषा बहुत ही प्राचीन वैज्ञानिक व समृद्धि भाषा है जिसमें मिठास तो है ही साथ ही अपनत्व का भाव भी है। आज के दिन जब पूरा सिंधी समाज इस समय घर पर परिवार के साथ बैठा है और पुरानी यादों को ताजा कर सिंधी व्यजनों का आंनद लिया।

सिंध प्रांत में बोली जाने वाली मुख्य भाषा

उन्होंने कहा कि सिंधी भारत के पश्चिमी हिस्से और मुख्य रूप से सिंध प्रान्त में बोली जाने वाली एक प्रमुख भाषा है। यह सिंधी हिंदू समुदाय (समाज) की मातृ-भाषा है। गुजरात के कच्छ जिले मे सिंधी भाषा को कच्छी भाषा कहते हैं। इसका संबंध भाषाई परिवार के स्तर पर आर्य भाषा परिवार से है जिसमें संस्कृत समेत हिन्दी, पंजाबी और गुजराती भाषाएं शामिल हैं। अनेक मान्य विद्वानों के अनुसार आधुनिक भारतीय भाषाओं में, सिन्धी, बोली के रूप में संस्कृत के सर्वाधिक निकट है। सिन्धी के लगभग ७० प्रतिशत शब्द संस्कृत मूल के हैं।

Posted By: Sameer Deshpande

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